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“माँ, मुझे क्यों छोड़ गई… मेरा क्या कसूर था?” धान के खेत में मिली नवजात, ग्रामीणों ने बचाई जान


फलका थाना क्षेत्र के गोविंदपुर पंचायत अंतर्गत महेशपुर गांव में शुक्रवार की सुबह उस वक्त माहौल गमगीन हो गया, जब धान के खेत से एक नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। खेत की ओर पहुंचे ग्रामीणों ने देखा कि एक मासूम बच्ची लावारिस हालत में पड़ी थी। कुछ ही पल में वहां लोगों की भीड़ जुट गई और ग्रामीणों ने बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला।

नवजात को देखकर ग्रामीणों का कलेजा भर आया। आखिर किसने इस मासूम को जन्म के बाद खेत में छोड़ दिया? वह मासूम तो दुनिया में आने के बाद सिर्फ अपनी मां की गोद और ममता चाहती थी। मानो उसकी खामोश आंखें यही सवाल कर रही हों—“माँ, मुझे क्यों छोड़ गई… मेरा क्या कसूर था?”

ग्रामीण अंजनी देवी ने इंसानियत का परिचय देते हुए बच्ची को अपनी गोद में उठाया और उसकी देखभाल शुरू की। इसके बाद उसे तत्काल फलका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अस्पताल में नवजात का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी स्थिति सामान्य बताई।

घटना की सूचना मिलने के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड हेल्पलाइन कटिहार की टीम महेशपुर गांव पहुंची। टीम ने ग्रामीणों को बाल संरक्षण से जुड़े नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद नवजात बच्ची को सुरक्षित संरक्षण के लिए बाल संरक्षण इकाई के सुपुर्द कर दिया गया।

मासूम के मिलने की खबर गांव में फैलते ही लोगों की भीड़ जुट गई। हर कोई बच्ची के सुरक्षित भविष्य की कामना करता नजर आया। ग्रामीणों की संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया कि मुश्किल घड़ी में इंसानियत आज भी जिंदा है।

वहीं, नवजात को खेत में छोड़ दिए जाने की घटना ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। आखिर वह कौन था, जिसने इस मासूम को जन्म के बाद अपनाने के बजाय मौत के मुंह में छोड़ दिया? फिलहाल बच्ची बाल संरक्षण तंत्र की निगरानी में है और उसके भविष्य को लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
एक तरफ मां की ममता से महरूम हुई मासूम की कहानी आंखें नम कर देती है, तो दूसरी तरफ अंजनी देवी और ग्रामीणों की संवेदनशीलता इंसानियत पर भरोसा कायम करती है।

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