बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले 24 वर्षीय मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद आतंकी फंडिंग और पाकिस्तान से कथित संपर्क का सनसनीखेज मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंधों के आरोप में जफर को गिरफ्तार किया है। एटीएस के मुताबिक, वह मदरसे के नाम पर चंदा जुटाकर उसे पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा था।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोहम्मद जफर पुत्र मोहम्मद जहीर, निवासी मीरगंज, थाना रौटा, जिला पूर्णिया के रूप में हुई है। एटीएस के मुताबिक, जफर को 16 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी उसके कथित आतंकी नेटवर्क, पाकिस्तान में मौजूद संपर्कों, सोशल मीडिया गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल कर रही है।
मेरठ के मदरसे में 2017 से 2022 तक की पढ़ाई
एटीएस की जांच में सामने आया है कि जफर पहले मेरठ में रहकर पढ़ाई कर चुका है। एजेंसी के अनुसार उसने वर्ष 2017 से 2022 तक मेरठ के कोतवाली क्षेत्र स्थित गुदड़ी बाजार के मदरसा दारुल उलूम शाही जामा मस्जिद में पढ़ाई की और वर्ष 2022 में मौलवी की डिग्री हासिल की।
पूछताछ में जफर ने कथित तौर पर बताया कि मदरसे में पढ़ाई के दौरान ही उसने जैश-ए-मोहम्मद के बारे में पढ़ा। एटीएस का दावा है कि इसी दौरान वह जिहाद और आतंकी संगठन से जुड़ी सामग्री के संपर्क में आया और बाद में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर की तकरीरों से प्रभावित हुआ।
सोशल मीडिया पर मसूद अजहर की तकरीरें साझा करने का आरोप
एटीएस के मुताबिक जफर सोशल मीडिया पर जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर की कथित भड़काऊ और जिहादी तकरीरें साझा करता था। एजेंसी का आरोप है कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को हिंसक जिहाद की ओर प्रेरित करने की कोशिश कर रहा था।
जांच में उसके मोबाइल फोन और सोशल मीडिया गतिविधियों के विश्लेषण से पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध व्हाट्सऐप ग्रुपों की जानकारी मिलने का भी दावा किया गया है। इन ग्रुपों में कथित तौर पर जिहाद और चंदे से संबंधित बातचीत होती थी। एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि इन ग्रुपों के जरिए उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।
मदरसे के नाम पर चंदा, पाकिस्तान तक पहुंचाने की कोशिश
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू कथित आतंकी फंडिंग है। एटीएस के अनुसार जफर मदरसे के नाम पर लोगों से चंदा जुटाता था और उस रकम को पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क तक पहुंचाने की कोशिश करता था।
जांच एजेंसी को इनपुट मिला था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मदरसे के नाम पर चंदा एकत्र कर रकम पाकिस्तान भेजने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद जफर की गतिविधियों की निगरानी शुरू की गई। एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चंदे के नाम पर कितनी रकम जुटाई गई, रकम कहां से आई और किन लोगों अथवा नेटवर्क तक पहुंचाई गई।
क्रिप्टो करेंसी के जरिए फंडिंग का आरोप
जांच में कथित तौर पर फंडिंग का एक और रास्ता सामने आया है। एटीएस के अनुसार जब पाकिस्तान में सीधे रकम भेजने में परेशानी हुई तो जफर ने पाकिस्तानी हैंडलर्स से Binance अकाउंट मांगा और कथित तौर पर USDT क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कई बार रकम भेजने का प्रयास किया। एटीएस अब इन क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किन लोगों तक पहुंची और इसके पीछे पाकिस्तान में सक्रिय कौन से हैंडलर थे।
मेरठ, हापुड़ समेत कई शहरों में बदलता रहा ठिकाना
एटीएस के मुताबिक जफर मूल रूप से पूर्णिया का रहने वाला है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उसका पुराना संपर्क रहा है। वह मेरठ आता-जाता रहा और बीते समय में मेरठ, हापुड़ समेत अन्य स्थानों पर अलग-अलग ठिकानों पर रहने की जानकारी जांच में सामने आई है। एटीएस ने उसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मिली खुफिया सूचना के आधार पर ट्रैक किया। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब एजेंसी कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है।
पाकिस्तान से जुड़े व्हाट्सऐप ग्रुप और हैंडलर्स की तलाश
जफर के मोबाइल फोन से पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध व्हाट्सऐप ग्रुप मिलने का दावा किया गया है। एटीएस के मुताबिक, वह जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े जिहादी ग्रुपों के संपर्क में आया था और कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क स्थापित कर चुका था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि जफर अकेले काम कर रहा था या उसके साथ भारत में अन्य लोग भी जुड़े थे। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मदरसों और उसके संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, किसी संस्था या मदरसे की संलिप्तता को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
यूपी एटीएस ने जफर के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 13/2026 दर्ज किया है। एजेंसी के मुताबिक उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 और 61(2) तथा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धारा 18 और 38 के तहत कार्रवाई की गई है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को नियमानुसार अदालत में पेश किया गया। अब एटीएस उसकी पूछताछ और उपलब्ध डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है।
पूर्णिया से पाकिस्तान तक कथित नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही ATS
जफर की गिरफ्तारी को यूपी एटीएस की अहम कार्रवाई माना जा रहा है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि पूर्णिया निवासी जफर का कथित नेटवर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पाकिस्तान तक कितना फैला हुआ था, उसके संपर्क में कितने लोग थे और चंदे के नाम पर जुटाई गई रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ।
फिलहाल एटीएस की जांच जफर के कथित आतंकी संपर्क, पाकिस्तान के हैंडलर्स, सोशल मीडिया गतिविधियों, व्हाट्सऐप ग्रुप और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कथित फंडिंग के इर्द-गिर्द घूम रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।
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