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गुलाबबाग पाट व्यवसायी भवन की 1.54 एकड़ जमीन किसकी? ट्रस्ट डीड सामने आते ही मालिकाना हक पर बड़ा सवाल

 

पूर्णिया/सिटिहलचल न्यूज

गुलाबबाग स्थित पाट व्यवसायी भवन की जमीन के मालिकाना हक को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आए ट्रस्ट डीड के एक अंश में जमीन और भवन के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि वर्ष 1961 में मौजा अब्दुल्ला नगर, पूर्णिया स्थित करीब 1 एकड़ 54 डिसमिल जमीन और अर्धनिर्मित भवन को पाट व्यवसायी संघ, गुलाबबाग के उपयोग के लिए दिए जाने की बात कही गई थी।ट्रस्ट डीड के अनुसार, 25 सितंबर 1961 को स्वर्गीय छोगमल बोराड द्वारा, गुलाबबाग पट व्यवसायी भवन के सचिव के रूप में, उक्त संपत्ति को व्यापारिक समुदाय के सामान्य कल्याण के लिए उपयोग करने की बात कही गई थी। बाद के वर्षों में संघ द्वारा सदस्यों के सहयोग से भवन में निर्माण एवं बदलाव कराए जाने और इसे स्थानीय व्यापारियों के कल्याण के लिए इस्तेमाल किए जाने का भी उल्लेख है।इसके बाद वर्तमान ट्रस्ट डीड में इस संपत्ति के बेहतर एवं प्रभावी प्रबंधन के लिए एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट गठित करने की बात कही गई है। दस्तावेज में ट्रस्ट के लिए ₹2.50 लाख की प्रारंभिक राशि दिए जाने का भी उल्लेख है


हालांकि, पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जमीन के वास्तविक मालिकाना हक को लेकर है। ट्रस्ट डीड में 1961 के दस्तावेज को आधार बनाकर जमीन और भवन का इतिहास बताया गया है, लेकिन केवल किसी संपत्ति के उपयोग के लिए दिए जाने या किसी घोषणा-पत्र में उसका उल्लेख होने से यह स्वतः स्पष्ट नहीं होता कि उस समय जमीन का कानूनी स्वामित्व पाट व्यवसायी संघ को हस्तांतरित हुआ था या नहीं।ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि 1961 के दस्तावेज में जमीन का वास्तविक हस्तांतरण हुआ था या केवल भवन एवं जमीन के उपयोग की अनुमति दी गई थी? वर्तमान राजस्व अभिलेख, जमाबंदी, खतियान और निबंधित दस्तावेजों में जमीन किसके नाम दर्ज है, यह भी इस पूरे मामले में निर्णायक हो सकता है।दूसरा अहम सवाल यह है

कि यदि जमीन पाट व्यवसायी संघ की संपत्ति थी, तो संघ के सचिव को अकेले उस संपत्ति को नए ट्रस्ट के अधीन करने का अधिकार किस आधार पर मिला? क्या इसके लिए संघ की विधिवत बैठक में प्रस्ताव पारित हुआ था? क्या सभी संबंधित सदस्यों की स्वीकृति ली गई थी? और क्या जमीन के हस्तांतरण के लिए आवश्यक निबंधित दस्तावेज मौजूद हैं?यानी मामला सिर्फ ट्रस्ट बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पाट व्यवसायी भवन की करीब 1 एकड़ 54 डिसमिल जमीन का मूल मालिक कौन था, 1961 में उसे किस अधिकार के साथ दिया गया था और वर्तमान में ट्रस्ट को उस पर मालिकाना हक किस दस्तावेज के आधार पर मिला—इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी है।अब जरूरत है कि 1961 के मूल दस्तावेज, वर्तमान जमाबंदी-खतियान, निबंधित दस्तावेज और ट्रस्ट डीड को सार्वजनिक रूप से सामने लाकर स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि पाट व्यवसायी भवन की करोड़ों की संभावित संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे।

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