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करीब 100 साल पुराना वैष्णवी दुर्गा मंदिर बना आस्था का केंद्र


कुरसेला। अयोध्यागंज बाजार स्थित करीब 100 वर्ष पुराना वैष्णवी दुर्गा मंदिर आज भी कुरसेला क्षेत्र की आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपरा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। पूजा-अर्चना, आरती और मां के जयकारों से मंदिर परिसर सहित आसपास का इलाका भक्तिमय हो उठता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार करीब एक सदी पूर्व कुरसेला स्टेट के रघुवंश सिंह परिवार ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। समय के साथ मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। कुरसेला के आसपास के गांवों के अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां वैष्णवी दुर्गा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। मंदिर में मां दुर्गा के विशेष स्वरूप की पूजा की जाती है, जिसमें देवी सिंह पर विराजमान होकर भक्तों को भयमुक्ति और कल्याण का आशीर्वाद देती हैं।

नारियल चढ़ाने की परंपरा, नहीं होती जीव बलि

वैष्णवी दुर्गा मंदिर की पूजा पद्धति इसकी अलग पहचान है। यहां मां को नारियल चढ़ाने की परंपरा है। श्रद्धालु नारियल का आधा हिस्सा मंदिर में अर्पित करते हैं, जबकि आधा प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। मंदिर की खासियत यह भी है कि यहां किसी जीव की बलि नहीं दी जाती। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले बलि की परंपरा थी, लेकिन ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों के सहयोग से इसे समाप्त कर सात्विक पूजा-पद्धति को अपनाया गया।

1990 के बाद बदला स्वरूप, शुरू हुआ हलवा भोग

स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 1990 के बाद ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। इसी दौरान श्वेत संगमरमर से निर्मित मां की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद बलि की जगह सात्विक पूजा को प्रमुखता दी गई और मां को हलवा का भोग लगाने की परंपरा शुरू हुई। नवरात्र के दौरान आज भी नारियल अर्पित करने के साथ मां को विशेष रूप से हलवा का भोग लगाया जाता है।

संध्या आरती में उमड़ती है भीड़

नवरात्र में सुबह से ही महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचने लगते हैं। संध्या आरती के समय श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है। मां के जयकारों और घंटियों की गूंज से अयोध्यागंज बाजार का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। मंदिर के आसपास पूजा सामग्री और प्रसाद की दुकानों पर भी चहल-पहल बढ़ जाती है।

समिति संभाल रही व्यवस्था

सार्वजनिक दुर्गा मंदिर समिति के कार्यकारिणी एवं सहयोगी सदस्य नवरात्र के दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, पूजा-अर्चना और अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु रखने के लिए समिति के सदस्य जुटे हुए हैं। समिति सदस्यों के अनुसार नवरात्र में मां को नारियल चढ़ाने और हलवा का भोग लगाने की परंपरा कायम रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

करीब एक सदी का इतिहास समेटे यह मंदिर आज केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि कुरसेला की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। बदलते समय के बावजूद मंदिर की पुरानी परंपराएं और श्रद्धालुओं की आस्था कायम है।

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