Top News

सीमांचल में फर्जी DL को लेकर अलर्ट, पूर्णिया समेत चार जिलों में जांच तेज

भागलपुर में 118 संदिग्ध ड्राइविंग लाइसेंस जांच के घेरे में, पुराने रिकॉर्ड भी खंगालने की तैयारी

पूर्णियाँ /बालमुकुन्द यादव 

सीमांचल में संदिग्ध और फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर परिवहन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज समेत सीमांचल के जिलों में ड्राइविंग लाइसेंस की जांच और सत्यापन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी बीच भागलपुर जिला परिवहन कार्यालय में 118 संदिग्ध ड्राइविंग लाइसेंस का अप्रूवल रोककर उनकी बारीकी से जांच की जा रही है। परिवहन विभाग अब केवल लाइसेंस के कागजी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि उसके डिजिटल रिकॉर्ड और आवेदक की वास्तविक पहचान का भी मिलान कर रहा है।भागलपुर में 1 से 28 सितंबर के बीच 118 लाइसेंस की लर्निंग लाइसेंस प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है। इनमें से 35 मामलों में कार्यालय में सक्रिय बिचौलियों द्वारा टेस्ट दिए जाने की बात सामने आई है। कुछ मामलों में दूसरे जिलों के लोगों के लाइसेंस का टेस्ट भी भागलपुर कार्यालय से दिए जाने की जानकारी मिली है। मोटर यान निरीक्षक की लॉगिन से प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद अपर जिला परिवहन अधिकारी ने अपनी लॉगिन से इन आवेदनों का अप्रूवल रोक दिया है। अधिकारियों के अनुसार आवेदक के सामने आने और आवश्यक जांच पूरी होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया होगी


संदिग्ध DL को लेकर मुख्यालय स्तर से भी सख्ती

राज्य के कई जिलों में संदिग्ध लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस बनने की सूचना मिलने के बाद जिला परिवहन कार्यालयों में जांच बढ़ाई गई है। खासकर सीमांचल के पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में परिवहन दस्तावेजों की जांच को गंभीरता से लिया जा रहा है। वाहन जांच के दौरान mParivahan ऐप और Sarathi पोर्टल के जरिए लाइव वेरिफिकेशन पर जोर दिया जा रहा है, ताकि मौके पर मौजूद व्यक्ति और उसके ड्राइविंग लाइसेंस के डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान किया जा सके।परिवहन विभाग को ऐसी जानकारी मिलने की बात सामने आई है कि पुराने या किसी दूसरे व्यक्ति के वैध ड्राइविंग लाइसेंस को स्कैन और एडिट कर उसका गलत इस्तेमाल करने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे मामलों में सिर्फ प्रिंटेड कार्ड या दस्तावेज देखकर लाइसेंस की वास्तविकता पकड़ना मुश्किल हो सकता है। इसलिए डिजिटल डेटाबेस में दर्ज जानकारी से मिलान को महत्वपूर्ण बनाया गया है।

पुराने लाइसेंस भी जांच के दायरे में

मौजूदा जांच सिर्फ नए आवेदन तक सीमित नहीं मानी जा रही है। संदिग्ध रिकॉर्ड सामने आने पर पुराने ड्राइविंग लाइसेंसों का भी सत्यापन किया जा सकता है। जांच में लाइसेंस पर दर्ज नाम, जन्मतिथि, पता, फोटो, लाइसेंस नंबर और अन्य विवरण को उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड से मिलाया जा सकता है।फर्जीवाड़े का एक संभावित तरीका दस्तावेजों की डिजिटल एडिटिंग से जुड़ा बताया जा रहा है। आशंका है कि किसी वास्तविक व्यक्ति के लाइसेंस या उससे जुड़े वैध दस्तावेज को स्कैन कर उसमें बदलाव किया जाए और फिर बदले हुए दस्तावेज के आधार पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से आवेदन किया जाए। 

सीमांचल क्यों है महत्वपूर्ण

पूर्णिया प्रमंडल में पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज चार जिले शामिल हैं। यह क्षेत्र पश्चिम बंगाल और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े इलाकों के कारण आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अररिया और किशनगंज की नेपाल से अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जबकि पूरा सीमांचल पश्चिम बंगाल के रास्ते पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत से जुड़ा हुआ है।ऐसे क्षेत्र में पहचान और परिवहन दस्तावेजों का सही सत्यापन केवल यातायात नियमों तक सीमित नहीं रहता। यदि किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़े दस्तावेज में फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो उसका असर अन्य सत्यापन प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है। 

पूर्णिया का परिवहन कार्यालय पहले भी रहा है चर्चा में

ड्राइविंग लाइसेंस और परिवहन कार्यालय से जुड़े बिचौलियों के मामले में पूर्णिया का रिकॉर्ड भी पुराना है। कुछ वर्ष पहले पूर्णिया पुलिस लाइन के सामने जिला परिवहन विभाग से जुड़े कथित बिचौलियों के ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। तलाशी के दौरान 150 ड्राइविंग लाइसेंस के स्मार्ट कार्ड, 125 ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित रजिस्ट्रेशन, दो लाख रुपये से अधिक नकदी और परिवहन विभाग से जुड़े करीब पांच बोरा कागजात बरामद किए गए थे। परिवहन विभाग के दलाल ने एक दूसरा ही परिवहन विभाग का कार्यालय जैसा खोल लिया था, जहाँ से धड़ाधड़ ड्राइविंग लाइसेंस बनाये जा रहे थे। उस कार्रवाई में कथित बिचौलियों के पास से जिला परिवहन पदाधिकारी और मोटर यान निरीक्षक की फर्जी मुहर भी बरामद किए गए थे।

दलालों की शिकायतों के बीच बदली व्यवस्था, मगर शिकायत नहीं हुई कम

समय के साथ ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन, स्लॉट बुकिंग, बायोमेट्रिक और ऑटोमेशन टेस्टिंग जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया। पूर्णिया में भी ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक तैयार किया गया है।अप्रैल 2025 में पूर्णिया के ऑटोमेशन टेस्टिंग ट्रैक पर मशीन से ड्राइविंग टेस्ट का ट्रायल शुरू हुआ था। ट्रैक पर 13 सेंसरयुक्त कैमरों के जरिए ड्राइविंग दक्षता की जांच की व्यवस्था बताई गई थी। टेस्ट के दौरान बायोमेट्रिक के जरिए फोटो लेने और ट्रैक पर वाहन की गतिविधियों को सेंसरयुक्त कैमरों से रिकॉर्ड करने की व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य ड्राइविंग टेस्ट में मानवीय हस्तक्षेप कम करना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना था। इसके बाबजूद मैनुवल तरीके से कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। 

फिर भी बिचौलियों की भूमिका पर उठती रही शिकायतें

तकनीकी व्यवस्था लागू होने के बावजूद पूर्णिया और अन्य जिलों में परिवहन कार्यालय के आसपास बिचौलियों की सक्रियता को लेकर शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों की शिकायत रही है कि ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को आसान या जल्दी कराने के नाम पर बिचौलिये आवेदकों से संपर्क करते हैं। इसमे परिवहन कार्यालयों के आसपास संचालित साइबर कैफे और सेवा केंद्रों की भूमिका रहती है


DL में फर्जीवाड़े का डिजिटल तरीका भी जांच के केंद्र में

मौजूदा जांच में सबसे महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान है। यदि किसी वैध लाइसेंस या उसके दस्तावेज को स्कैन कर उसमें नाम, फोटो, पता या अन्य विवरण बदलकर इस्तेमाल किया जाता है, तो केवल कार्ड देखकर इसे पकड़ना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में Sarathi के रिकॉर्ड और mParivahan पर उपलब्ध डिजिटल जानकारी से सत्यापन महत्वपूर्ण हो जाता है।ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन में पहचान, उम्र और पते से संबंधित दस्तावेज भी लगाए जाते हैं। परिवहन विभाग की आधिकारिक सूची में आधार, मतदाता सूची, पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र और अन्य निर्धारित दस्तावेजों को उम्र और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जाने का प्रावधान है। यही वजह है कि दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़ की स्थिति में केवल DL ही नहीं, बल्कि उसके आधार में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की भी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

पूर्णिया समेत चार जिलों पर इसलिए बढ़ी नजर

पूर्णिया और कटिहार पूर्वी बिहार के प्रमुख परिवहन केंद्र हैं, जबकि अररिया और किशनगंज नेपाल सीमा से जुड़े जिले हैं। इन जिलों से पश्चिम बंगाल और देश के दूसरे हिस्सों के लिए लगातार यातायात होता है। ऐसे में वाहन और चालक से जुड़े दस्तावेजों का सही सत्यापन परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ प्रशासनिक और सुरक्षा प्रक्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण है।फिलहाल भागलपुर में 118 संदिग्ध DL की जांच चल रही है, वहीं सीमांचल के जिलों में भी संदिग्ध लाइसेंस को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। विभाग की ओर से डिजिटल रिकॉर्ड के लाइव वेरिफिकेशन पर जोर दिया जा रहा है। पुराने लाइसेंसों की जांच में यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।अब जांच के आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होना बाकी है कि सीमांचल में कितने पुराने और नए लाइसेंस जांच के दायरे में आते हैं, कितने लाइसेंसों में वास्तविक अनियमितता मिलती है और क्या किसी संगठित बिचौलिया नेटवर्क की भूमिका सामने आती है। फिलहाल इन सवालों का जवाब संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post