राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी विभाग, मदन अहल्या महिला महाविद्यालय एवं आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘डिजिटल दुनिया में हिन्दी : इंस्टाग्राम से लेकर संसद तक’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के अंगवस्त्र से सम्मान के साथ हुई।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता रवींद्र भारती विश्वविद्यालय, कलकत्ता के प्रो. हितेंद्र पटेल ने कहा कि डिजिटल युग में हिन्दी समेत सभी भाषाओं के स्वरूप में बदलाव आया है। डिजिटल माध्यम ने हिन्दी का लोकतांत्रिकरण किया है। अब भाषा पर विशिष्ट वर्ग का नियंत्रण नहीं रहा, बल्कि आम व्यक्ति भी भाषा और डिजिटल माध्यम के जरिए प्रभाव पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम से लेकर संसद तक इसकी अनुगूंज दिखाई दे रही है। हिन्दी को समृद्ध बनाए रखने के लिए भाषा में विश्वास और विश्वसनीयता पैदा करने के साथ अनुभव और स्मृतियों को भी बचाना होगा।
विशिष्ट वक्ता मुंगेर विश्वविद्यालय के डॉ. अभय कुमार ने कहा कि डिजिटल दुनिया भाषाओं पर आश्रित है और डिजिटल युग ने भाषा को अकादमिक दायरों से निकालकर आम आदमी के हाथों में पहुंचाया है। भाषा को बचाने और समृद्ध करने के लिए केवल व्याकरण की कठोरता के बजाय संवेदनाओं की भाषा बनाने पर जोर देना होगा। आमजन की हिन्दी और हिन्दी के आमजन को बचाने की जरूरत है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. अवधेश रजक ने कहा कि हिन्दी को हर स्तर पर आत्मसात करने की आवश्यकता है। जिस भी विभाग में कार्यरत हों, वहां हिन्दी के सहज-सुलभ स्वरूप का अधिकाधिक प्रयोग किया जाना चाहिए। हिन्दी हमारी अस्मिता की प्रतीक है। हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि हिन्दी एक राष्ट्र के रूप में हमें एक सूत्र में पिरोती है और हमारी आत्मा को प्रकाशित करने वाली भाषा है। हिन्दी का वर्तमान और भविष्य उज्ज्वल है।
डॉ. अमलेन्दु ने कहा कि इंस्टाग्राम ने जनशक्ति में इजाफा किया है, लेकिन युवा पीढ़ी की ऊर्जा के क्षय में भी इसकी भूमिका है। सोशल मीडिया का उपयोग अनुशासित और जनोपयोगी तरीके से किया जाना चाहिए। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. धर्मेन्द्र दास ने कहा कि डिजिटल युग में हिन्दी ने खुद को पुनर्आविष्कृत किया है। वह अपनी परंपरा से जुड़े रहते हुए युगीन बदलावों को आत्मसात कर आगे बढ़ रही है।
कार्यक्रम में डॉ. रमेश मोहन शर्मा ‘आत्मविश्वास’ ने भी विचार रखे। मंच संचालन डॉ. धर्मेन्द्र दास तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आरती कुमारी ने किया। मौके पर डॉ. अन्तर्यामी कुमार अधिश्वर, मधुमति कुमारी, अवधेश मंडल, नीलू कुमारी, सुनीता कुमारी, हरेन्द्र कुमार, उदिता यादव, हिमांशु, देवेंद्र शर्मा, डॉ. राहुल कुमार, हिमांशु मिश्रा, सुभाष मंडल, अंशु अमन, सन्नी कुमार समेत बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद थीं।
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