गंगा-कोसी की बाढ़ ने कुरसेला प्रखंड के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों की जिंदगी को त्रासदी में बदल दिया है। घरों में पानी घुसने के बाद दर्जनों परिवार अपने मासूम बच्चों के साथ सड़क, पुल-पुलिया, बांध, रेलवे ढाला और माल गोदाम जैसे ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। सिर छिपाने की जगह तो किसी तरह मिल गई, लेकिन अब इन परिवारों के सामने बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
सबसे दर्दनाक तस्वीर उन माताओं की है, जिनकी गोद में दूधमुंहे बच्चे हैं। माल गोदाम में शरण लिए दर्जनों बच्चों के लिए दूध उपलब्ध नहीं होने से माताएं लगातार परेशान थीं। बिंदटोली निवासी पिंकी देवी, पूजा कुमारी, अंजली देवी और चांदनी देवी ने बताया कि वे करीब एक सप्ताह से छोटे-छोटे बच्चों के साथ माल गोदाम में रह रही हैं। बाढ़ के पानी से घर घिरे होने के कारण वहां लौटना संभव नहीं है।
दूध के लिए रोते रहे बच्चे, बेबस थीं माताएं
पीड़ित महिलाओं ने बताया कि घर में रहते हुए किसी तरह बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था हो जाती थी, लेकिन बाढ़ ने उनकी पूरी जिंदगी उलट दी। अब न घर बचा है, न रोजमर्रा की सुविधाएं। राहत स्थल पर बच्चों के लिए दूध नहीं मिलने से मासूम बच्चे रोते रहते थे और माताएं उन्हें चुप कराने की कोशिश में बेबस नजर आती थीं।
एक मां के लिए अपने बच्चे को भूख से रोते देखना कितना पीड़ादायक होता है, इसका अंदाजा माल गोदाम में मौजूद इन परिवारों की आंखों से लगाया जा सकता था। बाढ़ ने जहां इन परिवारों से उनका घर और सामान छीन लिया है, वहीं छोटे बच्चों के लिए एक गिलास दूध जैसी मामूली दिखने वाली जरूरत भी बड़ी समस्या बन गई थी।
आंगनबाड़ी सेवाएं भी हुईं प्रभावित
बाढ़ के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। ऐसे में बच्चों के दूध, पोषण, दवा और स्वच्छ पानी को लेकर परिवारों की चिंता और बढ़ गई है। माल गोदाम में बच्चों के लिए दूध की समस्या की जानकारी जिला एवं स्थानीय प्रशासन तक पहुंची तो अधिकारी हरकत में आए।
करीब दो घंटे के भीतर प्रशासन की ओर से राहत स्थल पर दूध पहुंचाया गया। अंचल पदाधिकारी अनुपम कुमारी के नेतृत्व में बच्चों के बीच दूध का वितरण कराया गया। दूध मिलने के बाद रोते बच्चों को राहत मिली तो परेशान माताओं के चेहरों पर भी सुकून दिखाई दिया।
सुबह-शाम मिलेगा बच्चों को दूध
अंचल पदाधिकारी अनुपम कुमारी ने बताया कि जिला पदाधिकारी के निर्देश पर बाढ़ राहत स्थल पर रह रहे नौनिहाल बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की गई है। बच्चों को सुबह और शाम दूध उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि बाढ़ की इस मुश्किल घड़ी में उन्हें पोषण संबंधी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
बाढ़ ने इन परिवारों से घर, सामान और सामान्य जिंदगी छीन ली है। उनके पास अब बचा है तो सिर्फ उम्मीद और मदद का इंतजार। ऐसे में मासूम बच्चों के लिए पहुंचा एक गिलास दूध सिर्फ राहत सामग्री नहीं, बल्कि उस मुश्किल वक्त में इंसानियत की गर्माहट भी बन गया। प्रशासन की इस पहल से फिलहाल नौनिहालों और उनकी माताओं को बड़ी राहत मिली है।
Post a Comment