रक्षाबंधन के पावन अवसर पर भाई-बहन के प्रेम और सामाजिक सौहार्द की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। युवा नेता माणिक आलम ने अपनी बहनों के साथ रक्षाबंधन का पर्व उत्साह और आत्मीयता के साथ मनाया। इस दौरान बहनों ने तिलक लगाकर उनकी कलाई पर राखी बांधी, मिठाई खिलाई और उनके सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं माणिक आलम ने भी बहनों को मिठाई खिलाकर उपहार भेंट किए।
माणिक आलम मुस्लिम समुदाय से आते हैं, लेकिन वे प्रत्येक वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर अपनी बहनों से राखी बंधवाकर इस पर्व को मनाते हैं। उन्होंने कहा कि त्योहारों की खूबसूरती उनकी धार्मिक पहचान से कहीं अधिक उनके मानवीय संदेश में होती है। रक्षाबंधन प्रेम, विश्वास, सम्मान और भाई-बहन के अटूट रिश्ते का पर्व है, जिसे किसी धर्म की सीमा में नहीं बांधा जा सकता।
उन्होंने कहा, “आस्था को किसी एक धर्म की सीमा में नहीं बांधा जा सकता। रिश्ते दिल से बनते हैं और प्रेम की कोई जाति या धर्म नहीं होता। रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास की वह डोर है, जो रिश्तों को और मजबूत करती है।”
रक्षाबंधन के मौके पर उनकी बहनों रेशमी निशा, रोशनी निशा, आफिया शमा, जोया प्रवीन, सालेहा प्रवीन, अमृत प्रवीन, अनिशा, सानिया एवं ममेरी बहन सामिया सुल्तान ने राखी बांधी। इस दौरान भाई साहिल आलम, मो. अनमोल, सेहलाब आलम, ममेरे भाई मो. दिलावर एवं मो. बाबर के साथ मिलकर सभी बहनों को मिठाई खिलाई गई और उपहार दिए गए।
**पर्व के बहाने दिया एकता का संदेश**
माणिक आलम ने कहा कि भारत की खूबसूरती इसकी विविधता में है। यहां अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होकर सामाजिक एकता और भाईचारे की मिसाल पेश करते हैं। रक्षाबंधन जैसे पर्व उस भावना को और मजबूत करते हैं, जहां रिश्तों के बीच धर्म की दीवार नहीं, बल्कि इंसानियत और अपनापन दिखाई देता है।
उन्होंने सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखी, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उनके इस आयोजन को भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ आपसी सद्भाव, सामाजिक एकता और गंगा-जमुनी तहजीब के संदेश के रूप में भी देखा गया।
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