सीमांचल से सटे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में एक अफगानी नागरिक के संदिग्ध परिस्थितियों में पकड़े जाने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। किशनगंज जिले से सटे पश्चिम बंगाल के पानीटंकी इमिग्रेशन चेक पोस्ट पर एसएसबी ने जांच के दौरान उसे हिरासत में लिया। वह नेपाल जाने के लिए एग्जिट परमिट लेने पहुंचा था।
मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि प्रारंभिक जांच में उसके मोबाइल फोन से कई पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों से संपर्क, संदिग्ध बातचीत और विदेश यात्राओं की जानकारी सामने आई है। जांच में यह भी पता चला है कि भारत में लंबे समय तक रहने के दौरान उसने कथित तौर पर भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे कई भारतीय दस्तावेज हासिल कर लिए थे। अब सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विदेशी नागरिक के पास भारतीय पहचान दस्तावेज कैसे पहुंचे और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।
नेपाल के रास्ते बैंकॉक जाने की थी योजना
जानकारी के अनुसार, 23 अगस्त को अफगान नागरिक पानीटंकी के रनिगंज चेक पोस्ट पहुंचा और नेपाल जाने के लिए निकास परमिट मांगा। उसने अधिकारियों को बताया कि वह नेपाल के रास्ते बैंकॉक जाना चाहता है। लेकिन पूछताछ के दौरान उसके व्यवहार और बातचीत के तरीके ने अधिकारियों का संदेह बढ़ा दिया।
इसके बाद एसएसबी अधिकारियों ने उसके मोबाइल फोन और दस्तावेजों की जांच शुरू की। मोबाइल की जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्हें सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से खंगाल रही हैं।
फेसबुक चैट में तत्काल बैंकॉक जाने की सलाह, मिले पाकिस्तानी नंबर
एसएसबी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मोबाइल फोन की जांच के दौरान फेसबुक पर हुई एक बातचीत का स्क्रीनशॉट मिला। इसमें एक व्यक्ति द्वारा उसे तत्काल बैंकॉक जाने की सलाह देने की बात सामने आई है।
इसके अलावा उसके मोबाइल में +92 कोड से शुरू होने वाले कई पाकिस्तानी मोबाइल नंबर भी पाए गए। पूछताछ में अफगान नागरिक ने दावा किया कि ये नंबर उसके व्यापारिक साझेदारों के हैं और उसका इनसे कोई अन्य संबंध नहीं है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां उसके इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही हैं।
2017 में आया था भारत, 2022 में खत्म हुआ वीजा
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि अफगान नागरिक वर्ष 2017 में वैध वीजा पर भारत आया था। इसके बाद वह हावड़ा और कोलकाता के आसपास रह रहा था। उसका भारतीय वीजा वर्ष 2022 में समाप्त हो गया था।
हालांकि इसके बाद एफआरआरओ कोलकाता की ओर से उसके पक्ष में एनओसी जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब जांच एजेंसियां उसके भारत में ठहरने, दस्तावेज हासिल करने और वीजा समाप्त होने के बाद की गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल—विदेशी नागरिक को कैसे मिले भारतीय दस्तावेज?
जांच के दौरान सामने आया कि भारत में लंबे समय तक रहने के दौरान उसने कई भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल कर लिए थे। इनमें कथित तौर पर भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र शामिल हैं।
यहीं से जांच और अधिक गंभीर हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक विदेशी नागरिक भारतीय पहचान व्यवस्था में प्रवेश कर इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज कैसे हासिल कर सका। दस्तावेजों की वैधता, जारी करने की प्रक्रिया और संभावित मददगारों की भी जांच की जा रही है।
अफगानिस्तान, रूस और बांग्लादेश की कर चुका है यात्राएं
पूछताछ के दौरान भारत में रहने के दौरान उसके अफगानिस्तान, रूस और बांग्लादेश की कई यात्राएं किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। एजेंसियां अब उसके पूरे यात्रा इतिहास की जांच कर रही हैं।
उसके विदेश दौरों का उद्देश्य क्या था, वह किन लोगों से मिलता रहा और उसके संपर्क किन देशों तक फैले हुए हैं—इन सभी बिंदुओं पर जांच जारी है।
सीमांचल क्षेत्र में लगातार विदेशी नागरिकों के पकड़े जाने से बढ़ी चिंता
किशनगंज देश का अत्यंत संवेदनशील सीमावर्ती जिला है। यह क्षेत्र नेपाल और बांग्लादेश की सीमा से जुड़ा होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्र से विदेशी नागरिकों का संदिग्ध परिस्थितियों में पकड़ा जाना और उनके पास भारतीय पहचान दस्तावेजों का मिलना देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
एसएसबी ने संदिग्ध गतिविधियों और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अफगान नागरिक को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई के लिए दार्जिलिंग जिले के खोरीबाड़ी थाना पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस अब उसकी वास्तविक पहचान, भारतीय दस्तावेजों की वैधता, विदेश यात्राओं और संपर्कों की विस्तृत जांच कर रही है।
फिलहाल जांच एजेंसियां किसी भी संभावित निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उसके सभी दावों और दस्तावेजों का सत्यापन कर रही हैं। मामले में नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
बड़ा सवाल यही—क्या सीमावर्ती इलाकों में विदेशी नागरिकों को भारतीय पहचान उपलब्ध कराने वाला कोई नेटवर्क सक्रिय है? जांच के बाद ही इस सनसनीखेज मामले की पूरी तस्वीर साफ होगी।
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