अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी और चढ़ावे से जुड़े मामले की CBI जांच की मांग को लेकर सोमवार को दिल्ली में बड़ा राजनीतिक और धार्मिक प्रदर्शन देखने को मिला। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए करीब 500 साधु-संत, महंत और महामंडलेश्वर मंडी हाउस पर एकत्रित हुए। इनकी योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास की ओर मार्च कर उन्हें ज्ञापन सौंपने की थी। इसी प्रदर्शन में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भी संतों के साथ शामिल हुए।
संतों का कहना था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी और गबन के मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रदर्शनकारी इस पूरे प्रकरण की CBI जांच की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपना चाहते थे।
पीएम आवास की ओर बढ़ने की कोशिश, पुलिस ने रोका
मंडी हाउस पर प्रदर्शन के बाद साधु-संतों ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने की तैयारी शुरू की। जैसे ही प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस की ओर से दिल्ली में लागू BNSS की धारा 163 और सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए जुलूस निकालने और बड़ी संख्या में लोगों के आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद मौके पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस के रोकने के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे। इसी दौरान पूर्णिया सांसद पप्पू यादव भी संतों के साथ सड़क पर उतर गए।
संतों के साथ सड़क पर लेट गए पप्पू यादव
पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने के विरोध में कई साधु-संत सड़क पर बैठ गए। इसी दौरान पप्पू यादव भी सड़क पर लेट गए और संतों के साथ विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। मौके पर राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच कराने और कथित गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। पप्पू यादव ने भी पुलिस कार्रवाई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यानी जिस प्रदर्शन में संत प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने के लिए पीएम आवास की ओर जाना चाहते थे, उसी मार्च में शामिल पप्पू यादव को पुलिस हिरासत में लेकर प्रदर्शन को आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
X पर पोस्ट कर PM मोदी पर सीधा हमला
हिरासत में लिए जाने से पहले और प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। सड़क पर संतों के साथ लेटे हुए अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए उन्होंने लिखा—
“चंदा चोर गद्दी छोड़, रामजी के लुटेरे कुर्सी छोड़!”
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि सरकार असली संतों के प्रदर्शन से डर रही है और उनके सामने पुलिस को खड़ा कर रही है। उनके इस बयान के बाद प्रदर्शन ने धार्मिक मुद्दे के साथ-साथ सीधा राजनीतिक रंग ले लिया।
हनुमानगढ़ी के संतों समेत करीब 500 महंत-महामंडलेश्वर हुए शामिल
प्रदर्शन में हनुमानगढ़ी के संतों सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से आए करीब 500 महंत और महामंडलेश्वर के शामिल होने का दावा किया गया। संतों की प्रमुख मांग राम मंदिर चढ़ावा मामले की CBI जांच थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान की राशि को लेकर किसी भी तरह का सवाल उठता है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर संत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन देना चाहते थे।
राम मंदिर चढ़ावा बना सियासी मुद्दा
राम मंदिर का मुद्दा पहले से ही भारतीय राजनीति के सबसे संवेदनशील और प्रभावशाली मुद्दों में रहा है। मंदिर निर्माण के बाद चढ़ावे और दान की राशि से जुड़े आरोपों ने अब इस मुद्दे को एक नए राजनीतिक मोड़ पर ला दिया है। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव लगातार राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। अब उनका संतों के साथ सड़क पर उतरना और पीएम आवास की ओर मार्च में शामिल होना इस मुद्दे को बिहार की राजनीति से निकालकर सीधे दिल्ली की सियासत के केंद्र में ले आया है।
संसद में भगवा पहनकर चंदे का नाट्य मंचन कर चुके हैं पप्पू यादव
राम मंदिर चंदे को लेकर पप्पू यादव पहले भी विवादों में रह चुके हैं। कुछ समय पहले संसद भवन में उन्होंने भगवा पहनकर दानपात्र से पैसे निकालने का नाट्य मंचन किया था।
उनके इस प्रदर्शन पर संत समाज के एक वर्ग ने कड़ी आपत्ति जताई थी। संत संगठनों ने इसे सनातन और संत परंपरा का अपमान बताते हुए पप्पू यादव के खिलाफ विरोध जताया था। इस विवाद के बाद संत संगठनों की ओर से उनके आवास के घेराव की बात भी सामने आई थी।
यही वजह है कि अब राम मंदिर चढ़ावे की CBI जांच की मांग को लेकर संतों के साथ पप्पू यादव का सड़क पर उतरना राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहले संतों के निशाने पर, अब उन्हीं के साथ प्रदर्शन
पप्पू यादव के राजनीतिक सफर में यह घटनाक्रम एक दिलचस्प विरोधाभास भी पैदा करता है। जिस मुद्दे पर उनके संसद में किए गए प्रदर्शन को लेकर संतों के एक वर्ग ने उनका विरोध किया था, उसी राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर अब वह संतों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रदर्शन करते दिखाई दिए। यह तस्वीर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पप्पू यादव ने इस बार अकेले सरकार के खिलाफ मोर्चा नहीं खोला, बल्कि बड़ी संख्या में साधु-संतों के साथ सड़क पर उतरकर अपनी मांग को राजनीतिक और धार्मिक दोनों समर्थन देने की कोशिश की।
सड़क पर ‘जय श्री राम’, सियासत में तेज हुई लड़ाई
मंडी हाउस की सड़क पर एक तरफ साधु-संत ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते नजर आए तो दूसरी तरफ पप्पू यादव के तीखे राजनीतिक नारों ने प्रदर्शन को सियासी रंग दे दिया।
पीएम आवास की ओर मार्च की कोशिश, पुलिस की रोक, सड़क पर संतों का बैठना और पप्पू यादव का उनके साथ लेट जाना—इन तस्वीरों ने पूरे घटनाक्रम को हाई-वोल्टेज राजनीतिक प्रदर्शन में बदल दिया। पुलिस द्वारा पप्पू यादव को हिरासत में लिए जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने जा रहा है।
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