अमौर विधानसभा क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। यह आरोप प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अबु सायम ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान लगाए। उन्होंने कहा कि जब वे अमौर विधानसभा के विभिन्न गांवों में जाकर लोगों की समस्याएं जान रहे थे, तब स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की कई तस्वीरें सामने आईं।
डॉ. सायम ने बताया कि धूसमल पंचायत स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति केवल एक भवन की समस्या नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि धूसमल, हफनिया, सिरसी, प्याजी, मंझोक, तालबाड़ी समेत कई स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से उपेक्षा के शिकार हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर भवन तो बना दिए गए, लेकिन न पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध हैं, न दवाइयां और न ही लोगों को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।
उन्होंने कहा कि अमौर और रौटा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी कागजों पर दर्ज सुविधाओं का केवल एक छोटा हिस्सा ही जमीन पर दिखाई देता है। कई बार अस्पतालों के वार्ड और बेड मरीजों की बजाय आवारा कुत्तों के कब्जे में नजर आते हैं, जो व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। डॉ. सायम ने सवाल उठाया कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में डॉक्टरों की तैनाती है तो वे अस्पतालों में मौजूद क्यों नहीं रहते। उन्होंने इसे विभागीय लापरवाही और जवाबदेही की कमी का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने विधायक अख्तरुल ईमान से भी मुलाकात की थी। उस समय विधायक ने आश्वासन दिया था कि यदि उन्हें जनसमर्थन मिला तो छह माह के भीतर स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। लेकिन पिछले पांच वर्षों में अस्पतालों की स्थिति में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं दिखा। आज भी कई अस्पताल बदहाल स्थिति में हैं, जहां न पर्याप्त चिकित्सक हैं और न ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं।
डॉ. सायम ने कहा कि विकास के दावों का मूल्यांकन भाषणों से नहीं, बल्कि अस्पतालों, स्कूलों, सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति से होना चाहिए। उन्होंने अमौर की जनता से अपने जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही तय करने और अधूरे कार्यों को पूरा कराने के लिए दबाव बनाने की अपील की।
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