पूर्णिया जिले के बहुचर्चित ताराबाड़ी डबल मर्डर केस में करीब चार वर्ष बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए ताराबाड़ी पंचायत के वर्तमान मुखिया एजाज अंजुम, सरपंच गुलाम सरवर उर्फ शौकत समेत आठ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश देशमुख की अदालत ने मंगलवार को सभी आरोपियों को हत्या का दोषी करार देते हुए केंद्रीय कारागार भेजने का आदेश दिया। अदालत ने सभी दोषियों पर 23-23 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सजा पाने वालों में वर्तमान मुखिया एजाज अंजुम, सरपंच गुलाम सरवर उर्फ शौकत, वार्ड सदस्य हसनैन, वार्ड सदस्य मोजिबुर रहमान उर्फ ललटू, अंजुम आदिल, अकील अहमद, जक्की अहमद और मोहम्मद जफर शामिल हैं।
पंचायती में मुखिया के फैसलों को चुनौती देना पड़ा भारी
इस हत्याकांड के पीछे पंचायत की राजनीति और वर्चस्व की लड़ाई बताई जाती है। जानकारी के अनुसार ताराबाड़ी पंचायत से शाहबाज आलम पंचायत समिति सदस्य निर्वाचित हुए थे। चुनाव जीतने के बाद वह गांव की छोटी-बड़ी पंचायती में सक्रिय भूमिका निभाने लगे थे। ग्रामीणों के बीच उनकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही थी। बताया जाता है कि कई मामलों में शाहबाज आलम पंचायती के दौरान मुखिया और सरपंच के फैसलों पर सवाल उठाते थे और उन्हें खुलकर चुनौती देते थे। पंचायत में उनका हस्तक्षेप और बढ़ता प्रभाव मुखिया और सरपंच को नागवार गुजरने लगा था। इसी विवाद ने धीरे-धीरे गहरी रंजिश का रूप ले लिया।
पंचायती के बहाने बुलाया, फिर रची गई खूनी साजिश
बताया जाता है कि 28 जून 2022 को एक पंचायती के बहाने शाहबाज आलम को बुलाया गया। शाहबाज आलम अपने सहयोगी मुनाजिर आलम के साथ पंचायती में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान ताराबाड़ी हाट के समीप पहले से घात लगाए 15 से 20 हमलावरों ने दोनों को घेर लिया।इसके बाद दोनों को खदेड़-खदेड़कर तलवार, लोहे की रॉड और अन्य धारदार हथियारों से हमला किया गया। यहाँ तक कि पंच का प्राइवेट पार्ट भी काट लिया गया था। हमले में शाहबाज आलम और मुनाजिर आलम की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस दोहरे हत्याकांड की बर्बरता ने पूरे सीमांचल क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था और इलाके में कई दिनों तक तनाव का माहौल बना रहा।
पत्नी के बयान पर दर्ज हुई थी एफआईआर
घटना के बाद मृतक शाहबाज आलम की पत्नी साहनम के बयान पर बायसी थाना में कांड संख्या 265/22 दर्ज किया गया था। एफआईआर में 17 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था।
बाद में नौ आरोपियों के खिलाफ अदालत में ट्रायल शुरू हुआ। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मृत्यु हो गई, जबकि शेष आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलता रहा। अपर लोक अभियोजक राहुल राजा ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट, अनुसंधान रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने आठों आरोपियों को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
फैसला सुनने के लिए अदालत में उमड़ी भीड़
मंगलवार को फैसला सुनाए जाने के दौरान ताराबाड़ी पंचायत से बड़ी संख्या में लोग अदालत पहुंचे थे। मृतकों के परिजन, ग्रामीण, आरोपियों के रिश्तेदार और समर्थक भी अदालत परिसर में मौजूद थे। फैसले के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
करीब चार वर्षों तक चले इस चर्चित मुकदमे में आए फैसले को पीड़ित परिवार ने न्याय की जीत बताया है। वहीं पूरे सीमांचल में इस निर्णय की चर्चा हो रही है। अदालत के इस फैसले ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पंचायत की सत्ता और राजनीतिक प्रभाव चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, कानून के सामने सभी बराबर हैं और अपराध साबित होने पर सजा तय है।
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