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14 करोड़ का पुल बना, लेकिन एप्रोच पथ नहीं; नाव और कंधों के सहारे पहुंची बारात


किशनगंज। सीमावर्ती किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत दल्ले गांव पंचायत से विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करने वाली एक तस्वीर सामने आई है। यहां एक दूल्हे को अपनी बारात के साथ ससुराल पहुंचने के लिए पहले नाव से नदी पार करनी पड़ी और फिर ग्रामीणों ने उसे कंधों पर बैठाकर दुर्गम रास्ता पार कराया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार गुरुवार को दल्ले गांव पंचायत निवासी मोहम्मद इफ्तखार के यहां विवाह समारोह आयोजित था। बारात को गांव तक पहुंचाने में सबसे बड़ी बाधा वर्षों से अधूरा पड़ा एप्रोच पथ बना। सड़क के अभाव में बारातियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दूल्हे को पहले नाव के सहारे नदी का हिस्सा पार कराया गया। इसके बाद जहां सड़क होनी चाहिए थी, वहां कीचड़ और दुर्गम रास्ता होने के कारण ग्रामीणों ने उसे कंधों पर उठाकर ससुराल तक पहुंचाया।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2019 में लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया गया था, लेकिन पुल के दोनों ओर एप्रोच पथ का निर्माण आज तक नहीं हो सका। नतीजतन करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया पुल लोगों के लिए बेकार साबित हो रहा है। ग्रामीण इसे "सफेद हाथी" करार दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि सिर्फ शादी-ब्याह ही नहीं, बल्कि बीमारी, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के आवागमन के लिए भी उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष समस्या उठाई गई, धरना-प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। एप्रोच पथ निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
दूल्हे के कंधों पर सवार होकर ससुराल पहुंचने की घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से अविलंब एप्रोच पथ का निर्माण कर आवागमन की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है

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