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आंगनवाड़ी सेविका-सहायिकाओं ने भरी हुंकार, मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन


 स्थानीय मार्केटिंग यार्ड परिसर में रविवार को बिहार राज्य आंगनवाड़ी सेविका-सहायिका संघ के बैनर तले प्रखंड स्तरीय विशाल बैठक आयोजित की गई। प्रखंड अध्यक्ष अलबेला बेगम की अध्यक्षता में हुई बैठक में सैकड़ों सेविका एवं सहायिकाओं ने भाग लिया। इस दौरान लंबित मांगों को लेकर कर्मियों ने आवाज बुलंद की और सरकार की कथित उपेक्षा पर नाराजगी जताई।

बैठक को संबोधित करते हुए अलबेला बेगम ने कहा कि आंगनवाड़ी सेविका-सहायिकाएं बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाती हैं। चुनाव ड्यूटी, सर्वे और अन्य सरकारी कार्यों में भी उनकी सेवाएं ली जाती हैं। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

उन्होंने मांग की कि सेविका-सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक सेविकाओं को 25 हजार और सहायिकाओं को 18 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम मानदेय दिया जाए। बीएलओ ड्यूटी, सर्वे सहित अतिरिक्त सरकारी कार्यों के लिए अलग से सम्मानजनक प्रोत्साहन राशि का भुगतान हो।

बैठक में सेवानिवृत्ति के बाद मासिक पेंशन, एकमुश्त ग्रेच्युटी तथा मानदेय भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने की मांग भी उठाई गई।

अलबेला बेगम ने चेतावनी दी कि संघ की तीन सूत्री मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रखंड से राज्य स्तर तक आंदोलन तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन भी शुरू किया जाएगा। बैठक में सेविका-सहायिकाओं ने एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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