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200 साल पुराना पोठिया दुर्गा मंदिर, कोसी नदी में बहकर पहुंची थी मां की प्रतिमा


 फलका प्रखंड के पोठिया बाजार स्थित श्रीश्री 108 दुर्गा मंदिर करीब दो सौ वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, वर्ष 1815 में गद्दी घाट के समीप कोसी नदी में मां दुर्गा की प्रतिमा बहकर पहुंची थी। ग्रामीणों ने प्रतिमा को नदी से निकालकर मां की पिंडी स्थापित की और झोपड़ीनुमा मंदिर बनाकर पूजा-अर्चना शुरू की। धीरे-धीरे मंदिर की प्रसिद्धि बढ़ती गई और आज यह क्षेत्र की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, मंदिर को भव्य स्वरूप देने में करीब 20 वर्षों का समय लगा। इसके बाद यहां लगभग 65 फीट ऊंचे मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर में आज भी कई पुरानी परंपराएं निभाई जाती हैं। इनमें शब्दा गांव के लोगों द्वारा प्रथम चढ़ावा चढ़ाने और कोहबारा गांव के लोगों द्वारा मुख्य ध्वजारोहण करने की परंपरा शामिल है।

**दशहरा में दुर्गा, काली पूजा में मां काली की प्रतिमा**

मंदिर की खास विशेषता यह है कि दशहरा के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है, जबकि काली पूजा में मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है। यहां 51 किलो वजन के लड्डू का भोग लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। दुर्गा पूजा के प्रथम दिन शब्दा गांव की ओर से सबसे पहले चढ़ावा चढ़ाया जाता है।

**पोखर में विसर्जन से जुड़ी है पुरानी मान्यता**

मंदिर से जुड़ी एक पुरानी धार्मिक कथा भी प्रचलित है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, एक बार जिस पोखर में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता था, उसमें पानी नहीं था। ऐसे में प्रतिमा का विसर्जन गद्दी घाट में किया गया। इसके बाद गांव में महामारी फैलने की बात कही जाती है। मान्यता है कि एक ग्रामीण को स्वप्न में मां दुर्गा ने उसी पोखर में प्रतिमा विसर्जित करने का निर्देश दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने गद्दी घाट से प्रतिमा निकालकर पोखर में विसर्जित की। ग्रामीणों का विश्वास है कि इसके बाद महामारी समाप्त हो गई। यह प्रसंग स्थानीय धार्मिक मान्यता और पीढ़ियों से चली आ रही कथा के रूप में प्रचलित है।

**दूर-दराज से मन्नत मांगने पहुंचते हैं श्रद्धालु**

मंदिर के पुजारी विजय कुमार झा के अनुसार, मां दुर्गा के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर मां के दरबार में पहुंचते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। दुर्गा पूजा शुरू होते ही पोठिया बाजार सहित आसपास का इलाका भक्तिमय हो जाता है। प्रथम पूजा से विजयादशमी तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है और मेले का भी आयोजन किया जाता है।

दुर्गा पूजा के दौरान पोठिया और आसपास के गांवों के अलावा रुपौली, धमदाहा और नवगछिया क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। करीब दो शताब्दियों से यह मंदिर लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है।

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