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JDU का नाम अब ‘जनता दल नीतीश’ होगा? संजय झा के प्रस्ताव से बिहार की सियासत में मची हलचल

जेडीयू का नाम बदलने की तैयारी? संजय झा ने दिया ‘जनता दल नीतीश’ का प्रस्ताव, बिहार की राजनीति में मचा सियासी हड़कंप

पटना/सिटी हलचल न्यूज़ 

बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड यानी जेडीयू के नाम को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने खगड़िया में आयोजित ‘नीतीश संवाद’ के दौरान पार्टी के नाम में ही नीतीश कुमार की पहचान जोड़ने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने पार्टी नेताओं से जेडीयू का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ करने की अपील की।अगर पार्टी इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है तो बिहार की राजनीति में यह बेहद बड़ा बदलाव होगा। जिस दल की पहचान अब तक जनता दल यूनाइटेड (JDU) के रूप में रही है, उसके नाम में सीधे नीतीश कुमार का नाम शामिल हो जाएगा। हालांकि, यह अभी संजय झा की ओर से रखा गया प्रस्ताव है और पार्टी की ओर से नाम बदलने का कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।संजय झा ने खगड़िया में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार के राजनीतिक योगदान और बिहार के विकास में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास और पार्टी के उत्थान के लिए पूरी ताकत और मनोयोग से काम किया है। उनके काम और योगदान को सम्मान देने के लिए पार्टी का नाम उनके नाम पर किया जाना चाहिए


जेडीयू’ में सीधे जुड़ जाएगा नीतीश का नाम

संजय झा की इस अपील का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि नीतीश कुमार लंबे समय से जेडीयू की राजनीति के सबसे प्रमुख चेहरे रहे हैं। वर्ष 2003 में समता पार्टी और शरद यादव के नेतृत्व वाले जनता दल के विलय के बाद जनता दल यूनाइटेड का गठन हुआ था। इसके बाद नीतीश कुमार पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेता और बिहार में जेडीयू की राजनीति का केंद्रीय चेहरा बने रहे।यदि ‘जनता दल नीतीश’ प्रस्ताव को पार्टी की मंजूरी मिलती है तो जेडीयू की पहचान और नीतीश कुमार की व्यक्तिगत राजनीतिक विरासत के बीच संबंध और भी सीधा हो जाएगा।

'बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुर’ करने की मांग के बीच नया सियासी संयोग

संजय झा का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब नीतीश कुमार के जन्मस्थान बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ किए जाने की मांग भी बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुर’ करने की मांग उठाई है।एक तरफ जन्मभूमि के नाम में नीतीश की पहचान जोड़ने की मांग और दूसरी तरफ उनकी पार्टी के नाम में नीतीश कुमार का नाम शामिल करने का प्रस्ताव—इन दोनों घटनाओं ने बिहार की सियासत में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

फरक्का जल संधि पर ‘नीतीश संवाद’ के बीच सामने आया प्रस्ताव 

संजय झा इन दिनों जेडीयू के ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान के तहत बिहार के गंगा किनारे बसे 12 जिलों का दौरा कर रहे हैं। अभियान की शुरुआत बक्सर से हुई है और इसमें भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार को शामिल किया गया है।खगड़िया में आयोजित कार्यक्रम में भी संजय झा ने फरक्का जल संधि को बिहार के हितों से जोड़ते हुए कहा कि वर्ष 1996 की संधि में बिहार के हितों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में समझौता होता है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर राज्य की हिस्सेदारी तय की जानी चाहिए।जेडीयू इस मुद्दे को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपना रही है। पार्टी का कहना है कि फरक्का बराज और गंगा में बढ़ती गाद के कारण बिहार में बाढ़ और जल प्रबंधन की समस्या गंभीर हुई है। संजय झा पहले ही कह चुके हैं कि बिहार के पानी के अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए


नीतीश के नाम पर जेडीयू की पूरी राजनीति?

राजनीतिक तौर पर देखें तो नीतीश कुमार ने जेडीयू को बिहार की सत्ता की राजनीति में एक निर्णायक ताकत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरजेडी के पारंपरिक यादव-मुस्लिम समीकरण के मुकाबले जेडीयू ने कुर्मी-कोइरी यानी ‘लव-कुश’ समीकरण के साथ अति पिछड़ा वर्ग को अपने राजनीतिक आधार में जोड़ा।नीतीश कुमार की राजनीति को ‘सुशासन’ और विकास के एजेंडे से भी जोड़ा गया। सड़क, बिजली, कानून-व्यवस्था, पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, साइकिल योजना और शराबबंदी जैसे फैसलों ने उनकी अलग राजनीतिक पहचान बनाई।इसके साथ ही गठबंधन की राजनीति में नीतीश कुमार की भूमिका ने जेडीयू को लंबे समय तक बिहार की सत्ता के केंद्र में बनाए रखा। भाजपा के साथ गठबंधन हो या आरजेडी के साथ राजनीतिक समीकरण—नीतीश कुमार बिहार की सत्ता की राजनीति में लगातार निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं।

नाम बदला तो सिर्फ पार्टी का नाम नहीं, पूरी ब्रांडिंग बदलेगी

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जेडीयू वास्तव में अपने नाम में बदलाव करेगी? यदि पार्टी ‘जनता दल नीतीश’ नाम को मंजूरी देती है तो इसका असर केवल पार्टी के नाम तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी की राजनीतिक ब्रांडिंग, संगठनात्मक पहचान और चुनावी प्रचार में भी नीतीश कुमार की छवि और अधिक केंद्र में आ सकती है।फिलहाल संजय झा का यह प्रस्ताव बिहार की राजनीति में नई चर्चा जरूर पैदा कर चुका है। एक ओर फरक्का जल संधि को लेकर ‘नीतीश संवाद’ के जरिए जेडीयू बिहार के जल अधिकारों का मुद्दा जनता के बीच ले जा रही है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के नाम में ही नीतीश कुमार को शामिल करने का प्रस्ताव सामने आना आने वाले दिनों की राजनीति के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।अब नजर इस बात पर है कि जेडीयू नेतृत्व संजय झा के ‘जनता दल नीतीश’ प्रस्ताव पर क्या फैसला लेता है।

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