बिहार में एक और पुल ध्वस्त! बीच पुल पर ट्रक पहुंचते ही भरभराकर नदी में समाया, 1.50 लाख लोगों पर आफत
पूर्णियां /बालमुकुन्द यादव
रविवार की सुबह पूर्णिया के अमौर इलाके में एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया। बालू से लदा ओवरलोड ट्रक जैसे ही परमान नदी पर बने पुराने लोहे के पुल के बीच पहुंचा, पुल का एक हिस्सा अचानक भरभराकर नदी में जा गिरा और ट्रक भी उसी के साथ गहरे पानी में समा गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि पुल के टूटने का अहसास होते ही ट्रक चालक ने समय रहते छलांग लगा दी और उसकी जान बच गई।हादसा अमौर प्रखंड के तियरपाड़ा पंचायत स्थित असियानी घाट पर हुआ। पुल के ध्वस्त होते ही जलालगढ़-अमौर संपर्क मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। इस सड़क के बंद होने का सीधा असर आसपास के दर्जनों गांवों और करीब 1.50 लाख की आबादी पर पड़ने की बात सामने आ रही है।
बीच पुल पर पहुंचा ट्रक और फिर मच गई तबाही
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रविवार सुबह बालू से पूरी तरह लदा एक भारी ट्रक असियानी घाट के पुराने लोहे के पुल से गुजर रहा था। ट्रक जैसे ही पुल के बीचों-बीच पहुंचा, अचानक पुल का ढांचा भारी वजन का दबाव नहीं झेल सका।कुछ ही सेकेंड में तेज आवाज के साथ पुल का स्लैब और लोहे का हिस्सा टूटकर नीचे नदी में जा गिरा। पुल के साथ ट्रक भी नदी में समा गया। अचानक हुए इस हादसे से आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया।चालक ने किसी तरह अपनी जान बचाई। अगर वह पुल टूटने का अंदाजा लगाकर समय रहते छलांग नहीं लगाता तो हादसा जानलेवा साबित हो सकता था
1.50 लाख लोगों के सामने बड़ी मुसीबत
पुल टूटने के बाद सबसे बड़ी परेशानी आसपास के ग्रामीणों और रोजाना इस मार्ग से आवागमन करने वाले लोगों के सामने खड़ी हो गई है। जलालगढ़ से असियानी होते हुए अमौर जाने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है।स्थानीय लोगों के अनुसार, इस रास्ते के बंद होने से अब लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब 35 से 40 किलोमीटर तक का अतिरिक्त सफर करना पड़ सकता हैस्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों से लेकर मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, किसानों और व्यापारियों तक को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
पुल टूटा तो फिर नाव बनेगी सहारा, लेकिन खतरा भी कम नहीं
सबसे बड़ी चिंता यह है कि सड़क संपर्क टूटने के बाद नदी पार करने के लिए लोगों को एक बार फिर नाव का सहारा लेना पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि नाव से नदी पार करना किसी खतरे से खाली नहीं है। खासकर बरसात और नदी में तेज बहाव के दौरान नाव से आवागमन लोगों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।।यानी एक तरफ 35-40 किलोमीटर का अतिरिक्त सड़क सफर, तो दूसरी तरफ नदी पार करने के लिए नाव का जोखिम—दोनों ही विकल्प ग्रामीणों के लिए परेशानी बढ़ाने वाले हैं
ढाई साल से बन रहा नया पुल, अब तक सिर्फ दो पाये!
हादसे के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भी फूट पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस पुराने पुल को लंबे समय से जर्जर बताया जा रहा था, उसके बगल में नया पक्का पुल बनाने का काम करीब ढाई वर्ष पहले शुरू हुआ था।लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक, इतने लंबे समय के बाद भी निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है और अब तक महज दो पाये ही खड़े किए जा सके हैं।लोगों का सवाल है कि अगर नया पुल समय पर बनकर तैयार हो जाता तो आज हजारों लोगों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
ओवरलोड ट्रक और अवैध बालू खनन पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद इलाके में अवैध बालू खनन और ओवरलोड वाहनों के परिचालन को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की नाक के नीचे इलाके में भारी मात्रा में बालू का अवैध खनन और ओवरलोड ट्रकों का परिचालन होता रहा है। लोगों का कहना है कि पुराने और जर्जर पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकने और उसकी स्थिति की निगरानी को लेकर भी गंभीर लापरवाही बरती गई।
विभाग और प्रशासन अलर्ट
घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण कार्य विभाग सक्रिय हुआ। RWD के कार्यपालक अभियंता/एसडीओ कालेश्वर प्रसाद ने बताया कि पुल ध्वस्त होने की जानकारी मिलते ही विभागीय तकनीकी टीम के साथ घटनास्थल का दौरा किया।वहीं अमौर की अंचलाधिकारी शबीना खातून ने बताया कि एहतियात के तौर पर नदी में राहत-बचाव और स्थिति की निगरानी के लिए SDRF की टीम को मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया गया है। फिलहाल पुल टूटने से सड़क संपर्क ठप है और हजारों परिवारों के सामने आवागमन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। एक जर्जर पुल के टूटने ने सिर्फ एक ट्रक को नदी में नहीं डुबोया, बल्कि पूरे इलाके की कनेक्टिविटी को संकट में डाल दिया है।



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