पूर्णियाँ /बालमुकुन्द यादव
बिहार में लॉटरी पर रोक है, लेकिन लॉटरी का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। पूर्णिया में पुलिस ने ऐसे ही एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है, जहां सवारी बस की डिक्की में कपड़े और सामान की जगह 1 लाख 2 हजार 900 लॉटरी टिकटों की खेप छिपाकर लाई जा रही थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह खेप पूर्णिया में अलग-अलग जगहों पर खपाई जानी थी। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और बंगाल तक फैले कनेक्शन को खंगाल रही है।पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि अररिया की ओर से आने वाली सवारी बस BR37P-8211 में भारी मात्रा में लॉटरी की खेप छिपाकर पूर्णिया लाई जा रही है। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस टीम ने वरीय अधिकारियों को जानकारी दी और शिशाबाड़ी पहुंचकर वाहनों की जांच शुरू कर दी। इसी दौरान पुलिस को संदिग्ध बस आती दिखाई दी। पुलिस ने बस को रुकने का इशारा किया। बस रुकते ही एक युवक नीचे उतरकर भागने लगा। पुलिस बल ने पीछा कर उसे पकड़ लिया
उसकी पहचान ललटु कुमार यादव (20), पिता अशोक यादव, निवासी परवाहा, थाना फारबिसगंज, जिला अररिया के रूप में हुई।इसके बाद पुलिस ने बस की तलाशी शुरू की। तलाशी के दौरान बस की डिक्की से पीले रंग का एक प्लास्टिक बोरा बरामद हुआ। बोरे के भीतर कार्टन रखे थे। पुलिस ने कार्टन खोले तो अंदर बड़ी संख्या में लॉटरी टिकट देखकर टीम भी हैरान रह गई। गिनती कराई गई तो कुल 1,02,900 लॉटरी टिकट बरामद हुए। पुलिस ने ललटु के पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया।पूछताछ में ललटु ने पुलिस को बताया कि लॉटरी की यह खेप एक व्यक्ति कार से लेकर आया था, लेकिन वह उसके नाम-पते के बारे में जानकारी नहीं दे सका। इसके बाद सिमराही बस स्टैंड के किरानी दर्शन कुमार के माध्यम से लॉटरी की खेप बस में रखी गई थी। पुलिस के मुताबिक, इस खेप को पूर्णिया बस स्टैंड के पास मिथुन कुमार पासवान को सौंपा जाना था। ललटु से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम पूर्णिया बस स्टैंड पहुंची।पुलिस के पहुंचने तक लॉटरी की खेप लेने के लिए मिथुन कुमार पासवान उर्फ अभिषेक पासवान (32), पिता राजकुमार पासवान, निवासी न्यू सिपाही टोला, मधुबनी, थाना मधुबनी, पूर्णिया वहां पहुंच चुका था। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से विवो कंपनी का स्क्रीन टच मोबाइल बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में मिथुन ने बताया कि वह पूर्णिया में अलग-अलग जगहों पर लॉटरी की बिक्री करता और करवाता है।पुलिस जांच में इस अवैध कारोबार का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है
आरोप है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग असली लॉटरी के बीच नकली लॉटरी टिकट मिलाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। यानी एक तरफ लोग जल्द अमीर बनने की उम्मीद में लॉटरी खरीद रहे थे, वहीं दूसरी तरफ इसी लालच को कमाई का जरिया बनाकर कथित लॉटरी कारोबारी बड़े पैमाने पर टिकटों का खेल चला रहे थे।इस मामले में पुलिस ने लॉटरी कारोबारी मिट्ठू चौहान, विक्रम चौहान और सुरेश चौधरी के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी खेप कहां से भेजी गई थी, इसे पूर्णिया में किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाना था और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस बंगाल से जुड़े नेटवर्क को भी खंगाल रही है।एक सवारी बस की डिक्की से एक साथ 1,02,900 लॉटरी टिकट बरामद होना इस अवैध कारोबार के बड़े पैमाने की ओर इशारा कर रहा है। बिहार में लॉटरी पर रोक के बावजूद इतनी बड़ी खेप पूर्णिया तक कैसे पहुंची, इसे भेजने वाला कौन है, बंगाल से लेकर पूर्णिया तक इस नेटवर्क में कितने लोग जुड़े हैं और असली लॉटरी में नकली टिकट मिलाकर कितने लोगों को अब तक चूना लगाया गया है, पुलिस इन सभी सवालों के जवाब तलाश रही है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।



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