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जमीन मालिक बंगाल में तो पूर्णिया में कैसे हुई रजिस्ट्री? अवर निबंधक उमाशंकर मिश्र ने दिया बड़ा स्पष्टीकरण, बोले- ई-केवाईसी के बिना संभव ही नहीं



जमीन मालिक बंगाल में है और पूर्णिया के निबंधन कार्यालय में उसकी जमीन की रजिस्ट्री हो गई—यह मामला इन दिनों पूर्णिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। जमीन मालिक के दूसरे राज्य में रहने के बावजूद पूर्णिया निबंधन कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री किए जाने को लेकर उठे सवालों के बीच अवर निबंधक उमाशंकर मिश्र ने पूरी निबंधन प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है।

अवर निबंधक ने शिकायतकर्ता के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि बिहार में लागू डिजिटल निबंधन व्यवस्था में ई-केवाईसी के बिना निबंधन की प्रक्रिया पूरी होना संभव नहीं है। क्योंकि सभी का ई-केवाईसी के माध्यम से सत्यापन किया जाता है।
दरअसल, पॉलिटेक्निक चौक निवासी त्रिदेव कुमार मेहता ने मौजा माधोपाड़ा, नेवालाल चौक स्थित 2 एकड़ 50 डिसमिल जमीन को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत की थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने उक्त जमीन को खरीदने के लिए रैयत अरुणांशु सूर के साथ निबंधित इकरारनामा किया था। बाद में जमीन की रजिस्ट्री किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में किए जाने की जानकारी मिलने पर उन्होंने आपत्ति जताई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि 12 सितंबर को उक्त जमीन का निबंधन जमीन मालिक के निबंधन कार्यालय में उपस्थित हुए बिना कर दिया गया। इसी आरोप को लेकर अब निबंधन कार्यालय की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, अवर निबंधक उमाशंकर मिश्र ने इन आरोपों को गलत बताया है।

अवर निबंधक उमाशंकर मिश्र ने
बताया कि निबंधन प्रक्रिया में ई-केवाईसी के माध्यम से पक्षकार की पहचान का सत्यापन किया जाता है। यह पहचान सुनिश्चित करने वाली सुरक्षा व्यवस्था है, जिसमें निर्धारित मानकों के तहत सत्यापन किया जाता है।

अवर निबंधक के मुताबिक, डिजिटल व्यवस्था को इस तरह तैयार किया गया है कि पक्षकार की पहचान और निबंधन प्रक्रिया को तकनीकी माध्यम से सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सके।
वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से पूर्व में निबंधन कार्यालय और जिलाधिकारी को सूचना दिए जाने के सवाल पर भी अवर निबंधक ने स्थिति स्पष्ट की।
उमाशंकर मिश्र के अनुसार, किसी दस्तावेज के निबंधन के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। सिर्फ किसी व्यक्ति के शिकायती आवेदन के आधार पर किसी दस्तावेज के निबंधन से इनकार करना वैधानिक नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी जमीन के निबंधन पर रोक लगानी है तो इसके लिए सक्षम न्यायालय का निषेधाज्ञा आदेश आवश्यक है। ऐसे न्यायिक आदेश के अभाव में केवल शिकायत के आधार पर निबंधन रोकना संभव नहीं है।
अवर निबंधक ने कहा कि निबंधन विभाग में ई-निबंधन के तहत पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से  संचालित की जा रही है। उन्होंने इसे पारदर्शी व्यवस्था बताते हुए कहा कि ई-केवाईसी के जरिए पक्षकार की पहचान का सत्यापन किया जाता है।
उनके मुताबिक, डिजिटल व्यवस्था में पहचान सत्यापन के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है

17 अगस्त से डिजिटल हुई निबंधन व्यवस्था

बता दें कि बिहार में 17 अगस्त 2026 से निबंधन कार्यालयों में जमीन और मकान के निबंधन की प्रक्रिया को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा गया है। इसके तहत पक्षकारों को कई प्रक्रियाओं के लिए पहले की तरह बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है और कई कार्य ऑनलाइन माध्यम से किए जा सकते हैं। इसी डिजिटल व्यवस्था के तहत ई-केवाईसी के माध्यम से पक्षकार की पहचान सत्यापित करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है।

इस पूरे मामले में एक तरफ शिकायतकर्ता ने जमीन के पूर्व इकरारनामे और विवाद का हवाला देते हुए निबंधन पर सवाल उठाए हैं, जबकि दूसरी तरफ अवर निबंधक उमाशंकर मिश्र का स्पष्ट कहना है कि केवल शिकायत के आधार पर किसी दस्तावेज का निबंधन रोका नहीं जा सकता।
उनके अनुसार, किसी जमीन के निबंधन पर रोक के लिए सक्षम न्यायालय का आदेश आवश्यक है। यानी जमीन को लेकर विवाद या शिकायत होना और उस जमीन के निबंधन पर न्यायालय की ओर से कानूनी रोक होना अलग-अलग स्थितियां हैं। ऐसे में इस मामले में निबंधन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का जवाब ई-केवाईसी रिकॉर्ड, निबंधन से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित न्यायालय के आदेशों से ही पूरी तरह स्पष्ट होगा।

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