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दो साल से मायके में रह रही थी पत्नी, परिवार परामर्श केंद्र ने कराई पति-पत्नी में सुलह

पूर्णिया/बालमुकुंद यादव

पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में शनिवार को कुल 21 मामलों की सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान 9 मामलों का निष्पादन किया गया। इनमें 7 मामलों में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया, जबकि 2 मामलों में समझौता नहीं होने पर उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए थाना अथवा न्यायालय भेज दिया गया।मामलों के समाधान में महिला थाना अध्यक्ष सह परिवार परामर्श केंद्र की संयोजिका राजनंदनी सिन्हा के साथ सदस्य अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक, स्वाति वैश्यंत्री, जीनत रहमान, रविंद्र शाह, आंचल और रागिनी तथा कार्यालय सहायक नारायण कुमार गुप्ता की अहम भूमिका रही


दो साल बाद पत्नी से हुआ मिलन

सुनवाई के दौरान रुपौली थाना क्षेत्र का एक पति अपनी पत्नी को वापस घर लाने की गुहार लेकर परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा। पति ने बताया कि उसकी पत्नी पिछले दो वर्षों से मायके में रह रही है। बार-बार बुलाने के बावजूद वह ससुराल नहीं लौट रही है।केंद्र की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद दोनों पक्ष सुनवाई में उपस्थित हुए। बातचीत के दौरान पत्नी ने आरोप लगाया कि उसका पति उसे जानवरों की तरह मारता है। उसने कहा कि ऐसी स्थिति में यदि वह मायके में नहीं रहेगी तो आखिर कहां जाएगी। केंद्र के सदस्यों ने दोनों पक्षों की बात सुनी और काफी देर तक समझाने-बुझाने का प्रयास किया।लगातार समझाने के बाद पति-पत्नी के बीच समझौता हो गया। करीब दो वर्षों की लंबी जुदाई के बाद दोनों फिर साथ रहने के लिए तैयार हो गए और खुशी-खुशी अपने घर के लिए रवाना हुए


माता-पिता के हस्तक्षेप से बिगड़ा परिवार, पति ने मांगा एक सप्ताह का समय

एक अन्य मामले में माता-पिता के अनावश्यक हस्तक्षेप के कारण एक बसा-बसाया परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गया था। परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों को समझाने का काफी प्रयास किया गया। करीब एक घंटे तक चली बातचीत के बावजूद पति इस बात पर अड़ा रहा कि वह अपने माता-पिता से इस मामले में बातचीत करने के बाद ही पत्नी को ससुराल ले जाएगा।पति ने केंद्र से समय की मांग की। इसके बाद परिवार परामर्श केंद्र ने उसे एक सप्ताह का समय दिया है। अब अगली सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच मामले के समाधान की कोशिश की जाएगी।परिवार परामर्श केंद्र में इस तरह के मामलों की सुनवाई के दौरान पति-पत्नी के बीच उत्पन्न विवाद को बातचीत और समझाइश के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाता है, ताकि परिवार को टूटने से बचाया जा सके।

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