Top News

बिहार पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट: परिसीमन से पहले नहीं होगा चुनाव, 7500 आबादी के मानक पर बदलेगी पंचायतों की तस्वीर

पटना /बालमुकुन्द यादव 

बिहार में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा और अहम अपडेट दिया है। पटना में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य में पंचायतों का परिसीमन कराया जा रहा है और परिसीमन पूरा होने के बाद ही पंचायती राज चुनाव कराए जाएंगे। यानी नई सीमा तय होने से पहले पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों के बीच हलचल बढ़ना स्वाभाविक है। खासकर मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए आने वाले समय में पंचायत की सीमा, आबादी और क्षेत्र में होने वाले बदलाव बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

7500 की आबादी के मानक पर होगा परिसीमन

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पंचायतों के परिसीमन के लिए 7500 की आबादी का मानक तय किया गया है। उनका कहना था कि बिहार में कई पंचायतें आबादी और भौगोलिक क्षेत्रफल के लिहाज से काफी बड़ी हैं, इसलिए उनकी सीमाओं को नए सिरे से व्यवस्थित करने की जरूरत है।मुख्यमंत्री ने अपने गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके गांव की आबादी करीब 20 हजार है, इसके बावजूद उसके साथ तीन अन्य गांव जुड़े हुए हैं और सभी मिलकर एक पंचायत का हिस्सा हैं। उन्होंने ऐसे उदाहरणों के जरिए बड़ी पंचायतों के पुनर्गठन की जरूरत पर जोर दिया।राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी परिसीमन संबंधी जानकारी के मुताबिक, जनसंख्या में बदलाव और नगर निकाय क्षेत्रों के विस्तार के कारण ग्राम पंचायत, वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जा रहा है। 2026 के परिसीमन में 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

नई पंचायत सीमा से बदल सकता है चुनावी गणित

परिसीमन का सबसे सीधा असर पंचायत चुनाव के क्षेत्रीय समीकरण पर पड़ेगा। किसी पंचायत में नए गांव जुड़ सकते हैं तो किसी गांव को दूसरी पंचायत में शामिल किया जा सकता है। इसी तरह वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में भी बदलाव हो सकता है।यही वजह है कि मौजूदा पंचायत की सीमा के आधार पर चुनावी तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों के सामने नई तस्वीर आने तक इंतजार की स्थिति बन गई है। परिसीमन के अंतिम स्वरूप के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन सा गांव किस पंचायत में रहेगा और किस क्षेत्र से कौन सा पद चुनाव के लिए निर्धारित होगा।

राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पंचायत परिसीमन 2026 के लिए ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद और वार्ड से संबंधित अधिसूचनाएं भी उपलब्ध हैं।

‘मुखिया के पास सबसे ज्यादा काम और ताकत’

ग्राम संसद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आम धारणा है कि देश में प्रधानमंत्री, राज्य में मुख्यमंत्री और जिले में जिलाधिकारी के पास सबसे ज्यादा शक्ति होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर मुखिया के पास सबसे अधिक काम और जिम्मेदारी होती है।उन्होंने कहा कि सांसद या विधायक के चुनाव की तुलना में स्थानीय स्तर पर वार्ड सदस्य और मुखिया का चुनाव कई मायनों में अधिक जटिल होता है। पंचायत चुनाव में स्थानीय रिश्ते और सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण होते हैं।मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र की जमीनी प्रकृति का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार व्यक्ति को यह भी पता नहीं होता कि उसके बगल में रहने वाला व्यक्ति किसे वोट दे रहा है। यहां तक कि परिवार के सदस्यों के मतदान की पसंद की जानकारी भी हमेशा नहीं होती। उनके मुताबिक यही लोकतंत्र की वास्तविक ताकत है।

पंचायतों से मांगा जाएगा विकास का ‘रिपोर्ट कार्ड’

मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिला परिषद, प्रखंड प्रमुख और मुखिया से यह पूछा जाना चाहिए कि उनके कार्यकाल के पांच वर्षों में उनके क्षेत्र की ‘जीडीपी’ कितनी बढ़ी।कार्यक्रम में उन्होंने पंचायतों को उपलब्ध होने वाले संसाधनों और विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, अगले पांच वर्षों में पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने की बात कही गई है।उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और जनता के सामने अपने क्षेत्र के विकास का हिसाब रखने की बात कही।

बिहार की पंचायत व्यवस्था में सरपंच की अलग भूमिका

मुख्यमंत्री ने बिहार की पंचायती राज व्यवस्था की विशेषताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार में ग्राम कचहरी और सरपंच की व्यवस्था है, जो इसे पंचायत स्तर की स्थानीय न्याय व्यवस्था के लिहाज से अलग पहचान देती है।मुख्यमंत्री ने पंचायतों की आर्थिक स्थिति और स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने की जरूरत पर भी चर्चा की। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गरीबों पर नया कर लगाने के बजाय ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल, मोबाइल टावर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों को राजस्व मिलना चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल—कब होगा पंचायत चुनाव?

मुख्यमंत्री के ताजा बयान से फिलहाल एक बात स्पष्ट है कि पंचायत चुनाव की आगे की प्रक्रिया परिसीमन से जुड़ी हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग परिसीमन की प्रक्रिया पर काम कर रहा है और उसकी वेबसाइट पर इससे जुड़े कई आदेश और अधिसूचनाएं जारी हो चुकी हैं।ऐसे में पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों की नजर अब नई पंचायत सीमाओं और परिसीमन के अंतिम स्वरूप पर टिकी है। नई सीमा तय होने के बाद ही पंचायत चुनाव का वास्तविक क्षेत्रीय गणित और विभिन्न पदों के चुनावी क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post