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सांप ने एक को काटा, दोनों को लगा AVS… इलाज के बाद दो मासूमों की मौत से मचा हड़कंप

 


पूर्णिया/सिटी हलचल न्यूज़ 

पूर्णिया जिले के बी.कोठी थाना क्षेत्र के मुलकिया पंचायत स्थित कमलपुर बिठैली गांव में सांप के डंसने के बाद इलाज के दौरान दो मासूमों की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सकीय लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर परिजनों के मुताबिक एक बच्चे को सांप ने काटा ही नहीं था, तो उसे एंटी स्नेक वेनम (एवीएस) क्यों लगाया गया? और यदि दोनों बच्चों को एवीएस दिया गया, तो क्या दोनों में सर्पदंश की चिकित्सकीय पुष्टि या उसके स्पष्ट लक्षण थे?घटना शनिवार की बताई जा रही है। मृतकों की पहचान मधेपुरा जिले के किशनपुर रतवारा थाना क्षेत्र के सुखार घाट निवासी कुंदन पासवान के 10 माह के बेटे निशांत कुमार और मीरगंज थाना क्षेत्र के दमैली पासवान टोला निवासी विवेक पासवान की 11 वर्षीय पुत्री प्रिया कुमारी के रूप में हुई है। दोनों बच्चे अपने ननिहाल कमलपुर बिठैली आए हुए थे।

 बच्चे को सांप ने एककाटा, दूसरे को सिर्फ डर था!

मृतक निशांत के पिता कुंदन पासवान और मां आंचल के अनुसार दोनों बच्चे रात में सो रहे थे। सुबह करीब चार बजे ज्योति प्रिया के दर्द से चिल्लाने पर परिजनों की नींद खुली। परिजनों का कहना है कि प्रिया ने अपनी बांह में सांप के डंसने की बात कही और उसके पास सांप भी दिखाई दिया। सांप को वहां से भगाने के बाद दोनों बच्चों को इलाज के लिए बीकोठी पीएचसी ले जाया गया।परिजनों का दावा है कि उन्होंने चिकित्सकों को स्पष्ट रूप से बताया था कि सांप ने प्रिया को डंसा है, जबकि निशांत को सांप के डंसने की कोई जानकारी नहीं थी। परिजनों के मुताबिक निशांत सिर्फ डर के कारण रो रहा था।इसके बावजूद अस्पताल में दोनों बच्चों को एवीएस इंजेक्शन दिए जाने का आरोप है। परिजनों का कहना है कि प्रिया को एवीएस और स्लाइन चढ़ाया गया, जबकि निशांत को भी बिना सर्पदंश की पुष्टि के एवीएस लगा दिया गया। इसके कुछ ही देर बाद निशांत की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।प्रिया की हालत भी गंभीर होने के बाद उसे जीएमसीएच पूर्णिया रेफर किया गया। हालांकि परिजनों के अनुसार अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी भी मौत हो गई


डॉक्टर का दावा- दोनों को डंसने की बात कही गई थी

मामले में बीकोठी सीएचसी के डॉ. राजीव कुमार ने परिजनों के आरोप से अलग दावा किया है। उनका कहना है कि दोनों बच्चों को सांप के डंसने की बात कही गई थी।

WHO की गाइडलाइन भी उठाती है बड़ा सवाल

सर्पदंश के इलाज को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन में एंटीवेनम के इस्तेमाल को चिकित्सकीय संकेतों से जोड़ा गया है। WHO के अनुसार एंटीवेनम देने के लिए सर्पदंश से होने वाली विषाक्तता के संकेतों का सही आकलन जरूरी है और एंटीवेनम का इस्तेमाल उस स्थिति में किया जाना चाहिए, जहां उसके लाभ जोखिम से अधिक हों।इसलिए बीकोठी की घटना में यह जानना बेहद जरूरी है कि 10 माह के निशांत में सर्पदंश या विषाक्तता के कौन से चिकित्सकीय संकेत मौजूद थे और किस आधार पर उसे एवीएस दिया गया।

सबसे बड़ा सवाल- डॉक्टर की लापरवाही की जांच कौन करेगा?

इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रक्रिया पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर किसी सरकारी अस्पताल के डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगता है और उसी विभाग के चिकित्सकों की टीम मामले की जांच करती है, तो जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।आरोप डॉक्टर पर है, जांच भी डॉक्टरों की टीम करेगी और अंतिम चिकित्सकीय राय भी डॉक्टर ही देंगे। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि जांच डॉक्टर करें या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या जांच टीम संबंधित अस्पताल और आरोपी चिकित्सक से पूरी तरह स्वतंत्र होगी?क्या मामले में बाहरी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा? क्या मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएंगे? क्या एवीएस की शीशी, बैच नंबर, डोज और उसे दिए जाने का समय जांच में शामिल होगा? क्या दोनों बच्चों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का स्वतंत्र विशेषज्ञों से चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाएगा? और सबसे अहम—क्या मौत के कारण की वैज्ञानिक तरीके से पड़ताल होगी


इन सवालों का जवाब जरूरी है, क्योंकि मामला दो मासूमों की जान से जुड़ा है।

विशेषज्ञ ने भी बताई एवीएस के इस्तेमाल की अहमियत

एफएमटी विभाग के पीएचओडी डॉ. पंकज कुमार के अनुसार, सर्पदंश की आशंका होने पर पहले मरीज का चिकित्सकीय आकलन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के मामलों में पलक झपकने में परेशानी, चक्कर, धुंधला दिखाई देना और एक वस्तु का दो दिखाई देना जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।उनके मुताबिक यदि किसी व्यक्ति को सांप ने नहीं काटा है और उसे स्नेक बाइट का एवीएस या अन्य उपचार दिया जाता है, तो इससे गंभीर प्रतिकूल प्रभाव का खतरा हो सकता है और स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।WHO भी एंटीवेनम को गंभीर सर्पदंश में महत्वपूर्ण उपचार मानता है, लेकिन साथ ही सही निदान और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा मरीज के आकलन पर जोर देता है।

दो मौतें, कई सवाल और अब निष्पक्ष जांच का इंतजार

बी.कोठी की घटना में एक तरफ डॉक्टर का दावा है कि दोनों बच्चों को सांप के डंसने की बात कही गई थी, वहीं दूसरी तरफ परिजन साफ तौर पर कह रहे हैं कि 10 माह के निशांत को सांप ने नहीं काटा था।ऐसे में सच्चाई सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से सामने नहीं आएगी। इसके लिए दोनों बच्चों के मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार की टाइमलाइन, एवीएस देने का निर्णय, दवा की मात्रा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अस्पताल में मौजूद चिकित्सकीय दस्तावेजों की स्वतंत्र विशेषज्ञों से जांच जरूरी है।आखिर दो मासूमों की मौत कैसे हुई? क्या इलाज में कोई चूक हुई? क्या एवीएस देने का चिकित्सकीय आधार मौजूद था? या मौत की कोई दूसरी वजह थी?इन सवालों का जवाब अब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही सामने आना चाहिए।

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