पूर्णियां /सिटी हलचल न्यूज़
पूर्णिया। त्योहारों का मौसम आते ही मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इसी के साथ पूर्णिया जिले में मिठाइयों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण बाजारों तक मिठाई की दुकानों पर जांच और सैंपलिंग तो होती है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इन सैंपलों की जांच रिपोर्ट का क्या होता है? कार्रवाई हुई तो उसका परिणाम आम लोगों के सामने क्यों नहीं आता?हाल के दिनों में पूर्णिया शहर और जिले के अलग-अलग इलाकों में प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मिठाई दुकानों पर छापेमारी कर सैंपल लिए हैं। 3 सितंबर को शहर की तीन बड़े मिठाई दुकानों से पनीर, घी, रसगुल्ला, काजूकतली और पेड़ा समेत सात सैंपल लिए गए थे। अधिकारियों ने इन्हें जांच के लिए लैब भेजने की बात कही थी।इसके बाद भवानीपुर और डगरूआ में भी मिठाई दुकानों की जांच की गई। भवानीपुर में अधिकारियों ने मिठाइयों के सैंपल लेने के साथ साफ-सफाई और अन्य मानकों की जांच की। वहीं डगरूआ में छापेमारी के दौरान मिठाई के नमूने जांच के लिए लिए गए। डगरूआ में टीम के पहुंचने की खबर के बाद कई दुकानदारों के दुकान बंद कर फरार हो गए।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल—सैंपल के बाद रिपोर्ट कहां?
मिठाई दुकानों से सैंपल लेने की कार्रवाई कोई नई बात नहीं है। सवाल यह है कि जिन दुकानों से सैंपल लिए जाते हैं, उनकी लैब रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं होती? यदि किसी मिठाई में मिलावट या मानक से कम गुणवत्ता पाई जाती है तो संबंधित दुकानदार के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, इसका विवरण भी लोगों के सामने आना चाहिए।जनवरी 2026 में पूर्णिया में मिलावटी और गुणवत्ताहीन खाद्य पदार्थों को लेकर प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी मिठाई, तेल, मसाले समेत कई खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायतों का उल्लेख किया गया था।
दूध की सप्लाई और मिठाई का कारोबार
पूर्णिया में दूध की उपलब्धता और जिले में होने वाले मिठाई के कारोबार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बाजार में बड़े पैमाने पर दूध से बनी मिठाइयां बिकती हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिले में उपलब्ध दूध की मात्रा के मुकाबले इतनी बड़ी मात्रा में दूध आधारित मिठाइयां आखिर किस कच्चे माल से तैयार हो रही हैं?
क्या इन मिठाइयों में दूध के अलावा मिल्क पाउडर, स्टार्च, वनस्पति वसा या अन्य विकल्पों का इस्तेमाल हो रहा है?
FSSAI की गाइडेंस के मुताबिक दूध से बनने वाली मिठाइयां सीमित अवधि तक ही सुरक्षित रहती हैं और दूध आधारित मिठाइयों में मिलावट तथा घटिया उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है।
बंगाल से आने वाली मिठाइयों पर भी सवाल
वही दूसरी ओर पश्चिम बंगाल से पिकअप वाहनों के जरिए बड़ी मात्रा में तैयार मिठाइयां पूर्णिया लाई जाती हैं। अगर प्रशासन चाहे तो इन नकली मिठाई को पूर्णियां पहुँचने से दालकोला चेकपोस्ट ही रोक सकती है। मगर सब जानते हुए भी खाद्य सुरक्षा विभाग चुप हैं। क्यों चुप हैं, इसका जवाब सारा पूर्णिया जानता है।
शहर के कुछ इलाकों को लेकर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर भट्टा कालीबाड़ी चौक, डीलक्स होटल, अंबेडकर मार्केट और मधुबनी-खुश्कीबाग इलाके में थोक नकली मिठाई बनाई जाती है। जहाँ से छोटे छोटे दुकानदार रोजाना ऑटो से लेकर जाते है। इन इलाकों से जिले के अलग-अलग हिस्सों में मिठाई की सप्लाई होती है। प्रशासन ने कभी भी इन कारखानों में जांच करने की जहमत नहीं उठाई है।
लोगो के जान से हो रहा खिलवाड़
दूषित खाद्य पदार्थों में मौजूद बैक्टीरिया और अन्य रोगाणु आंतों के संक्रमण का कारण बन सकते हैं। ज्यादा मात्रा में दूषित मिठाई खाने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी हो सकता है, जो बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है।वहीं, यदि लंबे समय तक घटिया या मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाए तो इस्तेमाल किए गए पदार्थ के आधार पर लिवर और किडनी पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा हो सकता है। अत्यधिक चीनी वाली मिठाइयां मधुमेह और मोटापे जैसी समस्याओं वाले लोगों के लिए भी नुकसानदेह हो सकती हैं।
त्योहार में बढ़ेगी मांग, तो बढ़ेगा खतरा?
त्योहारों के दौरान मिठाई की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में इनका कारोबार करोड़ो तक पहुँच जाता है।लेकिन अब जरूरत सिर्फ छापेमारी की नहीं, बल्कि सैंपल लेने से लेकर लैब रिपोर्ट और कार्रवाई के अंतिम परिणाम तक पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की है।आखिर सवाल मिठाई के स्वाद का नहीं, लोगों की सेहत का है। अगर मिठाई शुद्ध है तो जांच से दुकानदारों को भी क्लीन चिट मिलेगी और अगर मिलावट है तो कार्रवाई से उपभोक्ताओं को बचाया जा सकेगा।

Post a Comment