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पप्पू यादव के प्रदर्शन पर बोले मुनिश्री अरिजीत सागर, धर्म का उपहास उचित नहीं


संत मुनिश्री 108 अरिजीत सागर जी महाराज ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी भी धर्म, संत या धार्मिक परंपरा का उपहास उड़ाने का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए तथा सभी धर्मों और आस्थाओं का समान सम्मान होना चाहिए।

शनिवार को शहर के पारसनाथ भवन में मंगल कलश स्थापना कार्यक्रम से पूर्व आयोजित पत्रकार वार्ता में विशुद्ध पट्टाचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य मुनिश्री अरिजीत सागर ने जैन धर्म, चातुर्मास, वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि जैन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि अहिंसा, संयम, करुणा और आत्मअनुशासन पर आधारित जीवन-दर्शन है। चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि वर्षा ऋतु के चार महीनों में संत एक स्थान पर रहकर जप, तप, स्वाध्याय और साधना करते हैं। इस अवधि में समाज में नैतिक मूल्यों के प्रसार के साथ देश, प्रदेश और विश्व में शांति, सद्भाव तथा मानव कल्याण की कामना की जाती है।

पत्रकारों द्वारा पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के संत का वेश धारण कर कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर किए गए प्रदर्शन से जुड़े सवाल पर मुनिश्री ने कहा कि विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी भी धर्म या उसकी परंपराओं का उपहास करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान लोकतांत्रिक समाज की मूल आवश्यकता है।

मुनिश्री ने वर्तमान सामाजिक चुनौतियों और नैतिक जीवन पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वास्तविक शांति भौतिक सुख-सुविधाओं से नहीं, बल्कि आत्मसंयम और आध्यात्मिक जीवन से प्राप्त होती है। जितना व्यक्ति भौतिक वस्तुओं के पीछे भागता है, उतनी ही अशांति उसके जीवन में बढ़ती जाती है।

इस अवसर पर तेरापंथ समाज के अध्यक्ष त्रिलोक चंद जैन, सुरेश जैन, सचिव संतोष पाटनी सहित समाज के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

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