बेहतर नौकरी, अच्छी कमाई और सुनहरे भविष्य का सपना लेकर दुबई पहुंचे अमौर विधानसभा क्षेत्र के सात युवक अब विदेश की धरती पर कथित तौर पर फंसकर रह गए हैं। युवकों का आरोप है कि उन्हें विदेश भेजने वाले एजेंट ने दुबई में मोजा फैक्टरी में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर प्रत्येक से करीब डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लिए, लेकिन दुबई पहुंचने के बाद न उन्हें नौकरी मिली और न ही उनका पासपोर्ट वापस किया जा रहा है। पीड़ित युवकों ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद मामला सामने आया। वायरल वीडियो में युवकों ने जो हालात बताए हैं, वे विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाले कथित फर्जीवाड़े की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।
अमौर के रहने वाले हैं सभी युवक
पीड़ित युवकों में दिलफरोज आलम, नासिर आलम, रब्बान खान, दानिश, नाजिश, शमशाद और एक अन्य युवक शामिल हैं। सभी पूर्णिया जिले के अमौर विधानसभा क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। वीडियो में युवकों ने कहा कि उनकी स्थिति बेहद दयनीय हो गई है और वे काफी डरे हुए हैं। उनका आरोप है कि वे दुबई पहुंचने के बाद से लगातार मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
नौकरी का सपना दिखाया, दुबई पहुंचते ही पासपोर्ट जब्त करने का आरोप
पीड़ित युवकों के मुताबिक, एजेंट नाहिद गनी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि दुबई में मोजा फैक्टरी में अच्छी नौकरी मिलेगी और हर महीने बेहतर वेतन दिया जाएगा। इसी भरोसे पर युवकों ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर एजेंट को करीब डेढ़-डेढ़ लाख रुपये दिए और दुबई पहुंच गए।
लेकिन युवकों का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। न तो उन्हें वादा किया गया काम मिला और न ही रोजगार की कोई स्थायी व्यवस्था की गई। आरोप है कि एजेंट ने उनके पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिए और अब उन्हें वापस नहीं किया जा रहा है।
जेब खाली, खाने तक के पड़े लाले
नौकरी नहीं मिलने के कारण युवकों के पास जो भी रुपये थे, वे धीरे-धीरे खत्म हो गए। अब स्थिति यह हो गई है कि उनके सामने खाने-पीने तक का संकट खड़ा हो गया है।
वीडियो कॉल और सोशल मीडिया के माध्यम से युवकों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश पहुंचे थे, लेकिन अब वापस भारत लौटना भी उनके लिए मुश्किल हो गया है।
वीडियो वायरल होने के बाद कथित धमकी का आरोप
युवकों ने बताया कि उन्होंने अपनी परेशानी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया और मदद की अपील की। उन्होंने अमौर के पूर्व विधायक मुजाहिद आलम से भी हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई।
पीड़ितों का आरोप है कि मामला सामने आने के बाद एजेंट की ओर से उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। युवकों ने “देख लेने” और “सबक सिखाने” जैसी धमकी मिलने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पूर्व विधायक बोले— मामला बेहद गंभीर
पूर्व विधायक मुजाहिद आलम ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि वे इस संबंध में वरीय अधिकारियों से संपर्क करेंगे और युवकों को सुरक्षित भारत वापस लाने की पहल की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पहले भी विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर युवकों से मोटी रकम लेने और बाद में उन्हें परेशानियों में छोड़ देने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में एजेंटों की भूमिका की गंभीर जांच जरूरी है।
एजेंट पर कार्रवाई और युवकों की सुरक्षित वापसी की मांग
सात युवकों के दुबई में फंसे होने और पासपोर्ट जब्त किए जाने के आरोप के बाद स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर युवकों से नौकरी दिलाने के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लिए गए, तो उन्हें अब तक काम क्यों नहीं मिला? उनके पासपोर्ट किसके कब्जे में हैं और उन्हें वापस भारत आने से किस कारण परेशानी हो रही है?
पीड़ित युवकों के परिजनों ने केंद्र और बिहार सरकार से अपील की है कि मामले की जांच कराई जाए, युवकों को सुरक्षित भारत वापस लाया जाए और आरोप सही पाए जाने पर विदेश भेजने के नाम पर कथित ठगी करने वाले एजेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल दुबई में फंसे सात युवकों की निगाहें भारत में बैठे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मदद पर टिकी हैं।
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