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शहर के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में आयोजित दो दिवसीय महाकाल महोत्सव का समापन गुरुवार को हवन, पूजन और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। महोत्सव के दूसरे दिन मंदिर के पुजारी साकेत बाबा तथा बनारस से आए महंत आचार्य कृष्णकांत त्रिपाठी एवं आचार्य बृजपाल त्रिपाठी के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भगवान महाकाल की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर और महाकाल की प्रतिमा को आकर्षक फूल-मालाओं से सजाया गया, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर के पुजारी साकेत बाबा ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी महाकाल महोत्सव पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित किया गया।
इससे पूर्व बुधवार शाम कलश विसर्जन को लेकर गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। वार्ड भ्रमण के बाद प्रेमपुल स्थित नदी में कलश विसर्जन किया गया और नए कलश में जल भरकर मंदिर लाया गया, जिसके साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
महाकाल महोत्सव में बिहार, पश्चिम बंगाल, नेपाल सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचे। मान्यता है कि इस दौरान बाबा महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के राजेश दुबे, धर्मेंद्र सिंह, शंकर केशरी, दिया चारूस्त, सत्यम चारूस्त, मीरा सिन्हा, रोहित झा सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
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