पटना: पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने सोमवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यसभा चुनाव, कथित ऑपरेशन लोटस, बिहार में हो रहे एनकाउंटर, कानून-व्यवस्था और जातीय हिंसा को लेकर राज्य सरकार तथा बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान बिहार में लोकतंत्र को कमजोर करने और विपक्ष को तोड़ने की कोशिश की गई।
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को उनकी कुर्सी, ईडी और सीबीआई की कार्रवाई का डर दिखाकर राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ बड़े कारोबारी, राजनीतिक संपर्क रखने वाले लोग और बिचौलिए विधायकों तक संदेश पहुंचाने में लगे थे। सांसद ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान बिहार में लगभग 100 करोड़ रुपये आए और इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने अभय कुशवाहा, सुभाष यादव और समीर महासेठ समेत कुछ नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों के माध्यम से विधायकों तक कथित तौर पर लिफाफे पहुंचाए गए और दल बदलने का दबाव बनाया गया। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज समेत सभी साक्ष्यों की जांच कर हॉर्स ट्रेडिंग के मामलों में कार्रवाई की मांग की।
"भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए हो रहे एनकाउंटर"
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पप्पू यादव ने बिहार में लगातार हो रहे पुलिस एनकाउंटर पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि रिशु श्री, आनंद किशोर और अन्य कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों से जनता का ध्यान हटाया जा सके।
उन्होंने कहा कि कभी लालू प्रसाद यादव के आवास विवाद को मुद्दा बनाया जाता है तो कभी शिक्षक आंदोलन को अलग दिशा देने की कोशिश होती है। सांसद ने आरोप लगाया कि बिहार में निर्दोष और निहत्थे लोगों के एनकाउंटर कर न्यायपालिका को भी चुनौती दी जा रही है।
भरत तिवारी एनकाउंटर पर उठाए सवाल
पप्पू यादव ने आरा में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी न तो हिस्ट्रीशीटर था और न ही पुलिस पर फायरिंग कर रहा था, फिर भी उसका एनकाउंटर कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले को जातीय रंग देकर पेश किया गया।
सांसद ने मांग की कि पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए और यह भी पता लगाया जाए कि घटना के समय आरा के एसपी के साथ मुख्यालय से कौन अधिकारी संपर्क में था। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के कुछ लोगों ने भी यह स्वीकार किया है कि एनकाउंटर गलत था, तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
"20 साल की सरकार में अब अचानक एनकाउंटर क्यों?"
पप्पू यादव ने कहा कि बिहार में पिछले 20 वर्षों से एक ही राजनीतिक नेतृत्व सत्ता में है। यदि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की बात है तो पहले इस तरह के एनकाउंटर क्यों नहीं होते थे? उन्होंने सवाल किया कि यदि पुलिस और प्रशासन पूरी तरह निष्पक्ष हैं तो पप्पू पांडे और अनंत सिंह जैसे चर्चित मामलों में अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध, बलात्कार और हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सांसद ने कहा कि इन सभी मामलों को लेकर वे 24 जून को राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
नगरनौसा, बिहारशरीफ और बेगूसराय की घटनाओं का उठाया मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पप्पू यादव ने नगरनौसा, बिहारशरीफ और बेगूसराय की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नगरनौसा में डिग्री कॉलेज की मांग कर रही छात्राओं को प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रताड़ित किया और जेल भेजा। वहीं बिहारशरीफ में दो पासवान युवकों की हत्या को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा।
सांसद ने कहा कि बिहार में जातीय आधार पर हिंसा बढ़ रही है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यादव, पासवान, दलित और समाज के कमजोर वर्गों को अब बिहार छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने राज्य में बढ़ती अराजकता और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए व्यापक जांच और जवाबदेही की मांग की।
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