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भाजपा शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए नहीं बल्कि भ्रम में डाल कर सिर्फ़ सत्ता में हैं: प्रो.आलोक

पूर्णियाँ/सिटीहलचल न्यूज़

बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रमंडलीय प्रभारी सह राजद के वरिष्ठ नेता प्रोफ़ेसर आलोक कुमार ने बयान जारी कर कहा कि शिक्षक नियुक्ति नियामावली में बदलाव को लेकर शिक्षकों द्वारा विधानसभा मार्च के दरम्यान किये गये लाठीचार्ज एवं आँसू गैस के प्रयोग से हुए भगदड़ एवं एक व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु को दुखद बताया है ।प्रोफ़ेसर आलोक में इस तरह की घटना के लिए पूर्णतः भाजपा को ज़िम्मेदार ठहराया है। प्रतिबंधित क्षेत्र में आंदोलनकारियों को ज़बरन प्रवेश कराकर बड़ी घटना को अंजाम दिलाना भाजपा का मुख्य मक़सद था । प्रोफ़ेसर आलोक ने कहा कि भाजपा एवं RSS के लोग शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए नहीं बल्कि शिक्षकों को भ्रम में डाल कर सिर्फ़ सत्ता हथियाना ही मक़सद है । भाजपा के लोग जब नीतीश कुमार के चेहरे को आगे लाकर सत्ता की मलाई खा रहे थे तो कभी शिक्षकों के स्थाई नौकरी के लिए आवाज़ नहीं उठाया । देश के सभी केंद्रीय सेवाओं में भर्ती को बंद कर निजी क्षेत्र में शिक्षित बेरोजगारों के भविष्य को डालने वाले लोग बिहार में शिक्षकों को भड़का रहे हैं


वर्तमान महागठबंधन की सरकार बनने के बाद राजद के द्वारा पूर्व में किए गए घोषणा के अनुसार सभी सरकारी विभागों में स्थाई नौकरी की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है । बी पी एस सी एवं अन्य भर्ती आयोगों के द्वारा विश्वविद्यालयों एवं सभी शिक्षण संस्थानों में स्थाई एवं नियमित शिक्षकों की भर्ती की जा रही है । गुणवत्ता से पूर्ण शिक्षकों की नियुक्ति को रोकना , सरकारी विद्यालयों में नामांकित गरीबों के बच्चे जहाँ पंचानवे प्रतिशत अनुसूचित जाति -जन जाति एवं पिछड़े वर्ग  के छात्र पढ़ाई करते हैं ,उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना है । जबकि भाजपा एवं RSS के नेताओं के बच्चे क्रिश्चियन मशीनरी के विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बिहार सहित देश के सभी राज्यों में राष्ट्रीय शिक्षा परियोजना के अंतर्गत केंद्र सरकार के द्वारा प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में नियोजन इकाई के द्वारा भर्ती की प्रक्रिया की गई है 

इस प्रक्रिया से नियोजित शिक्षकों के स्थायीकरण का अधिकार किसी भी राज्य सरकार को नहीं है । इस मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी दिशा निर्देश जारी कर दिया है । बिहार के मुख्यमंत्री माननीय नीतीश कुमार एवं उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने नियोजित शिक्षकों को भी सरकारी सेवा कर्मी की तरह कई तरह की सुविधा प्रदान किया है । 60 वर्ष की उम्र सीमा एवं सरकारी कर्मी की तरह अन्य विशेष लाभ भी प्रदान किया गया है । प्रोफ़ेसर आलोक ने आंदोलनकारी शिक्षकों से शिक्षक भर्ती प्रतियोगिता में शामिल होकर बिहार सरकार के निर्णय के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सहयोग करने की अपील किया है ।

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