पूर्णियां/सिटी हलचल न्यूज़
ब्राह्मण समुदाय के अधिकार, सामाजिक सम्मान, सुरक्षा और सरकारी स्तर पर भागीदारी को लेकर पूर्णिया में ‘लोक मंच’ के बैनर तले संकल्प सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में समाज को संगठित करने के साथ-साथ सरकार के सामने ब्राह्मण समाज से जुड़ी कई प्रमुख मांगों को मजबूती से रखने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड की स्थापना, EWS वर्ग को अवसर और सम्मान, संस्कृत शिक्षा के संरक्षण तथा सरकारी सेवाओं में सहभागिता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
जिलों में संवाद के बाद अब पटना में बड़े कार्यक्रम की तैयारी
लोक मंच से जुड़े लोगों के अनुसार समाज की मांगों और समस्याओं को लेकर अलग-अलग जिलों में लगातार संवाद और सम्मेलन किए जा रहे हैं। कटिहार और सुपौल में कार्यक्रम आयोजित किए जाने के बाद मधेपुरा में भी कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। आयोजकों का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों की राय और प्रमुख समस्याओं को सामने लाया जा रहा है।सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि समाज की समस्याओं को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सरकार के सामने संगठित तरीके से रखा जाएगा। आने वाले दिनों में इन मांगों को लेकर पटना में बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने की बात भी कही गई
ब्राह्मण कल्याण बोर्ड बनाने की मांग
सम्मेलन में सबसे प्रमुख मांग ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के गठन की रही। लोक मंच के प्रतिनिधियों का कहना है कि ब्राह्मण समाज के शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर काम करने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था जरूरी है।आयोजकों ने सरकार से मांग की कि ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन कर उसके माध्यम से समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।
EWS वर्ग के लिए अवसर और सम्मान का मुद्दा
सम्मेलन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लोगों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि EWS वर्ग के लोगों को शिक्षा, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों का प्रभावी लाभ मिलना चाहिए।सरकारी व्यवस्था में पर्याप्त अवसर और सम्मान दिए जाने की मांग भी सम्मेलन में सामने आई।
संस्कृत महाविद्यालयों की बदहाली पर चिंता
ब्राह्मण समाज की पहचान और संस्कृत शिक्षा के मुद्दे को लेकर भी सम्मेलन में चिंता जाहिर की गई। वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत शिक्षा समाज की महत्वपूर्ण विरासत है, लेकिन कई संस्कृत महाविद्यालयों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।सरकार से संस्कृत शिक्षण संस्थानों के संरक्षण, संसाधनों की उपलब्धता और उनके विकास के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।
सरकारी सेवाओं में सहभागिता बढ़ाने की मांग
सम्मेलन में सरकारी स्तर पर ब्राह्मण समाज की सहभागिता का मुद्दा भी उठाया गया। आयोजकों ने कहा कि सरकारी सेवाओं और विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों को भी उनकी योग्यता के अनुरूप पर्याप्त अवसर और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।वक्ताओं ने कहा कि समाज के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकार को प्रभावी नीति पर काम करना चाहिए
समाज की आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति पर श्वेतपत्र की मांग
लोक मंच की ओर से ब्राह्मण समाज की शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति को लेकर श्वेतपत्र जारी करने की मांग भी की गई।आयोजकों का कहना है कि समाज की वास्तविक स्थिति से संबंधित आंकड़े सामने आने चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिक्षा, रोजगार और आर्थिक क्षेत्र में समाज किन चुनौतियों का सामना कर रहा है और किन क्षेत्रों में सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है।
अब आंदोलन को जिला स्तर से पटना तक ले जाने की तैयारी
पूर्णिया के संकल्प सम्मेलन के बाद लोक मंच की गतिविधियों को और व्यापक स्तर पर ले जाने की तैयारी है। आयोजकों के मुताबिक विभिन्न जिलों में कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को एकजुट किया जा रहा है।जिला स्तर पर संवाद और सम्मेलन के बाद पटना में बड़े कार्यक्रम के जरिए सरकार के सामने सभी मांगों को एक साथ रखने की रणनीति बनाई जा रही है।सम्मेलन में वक्ताओं ने समाज के लोगों से एकजुट होकर अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने की अपील की। आयोजकों का कहना है कि उद्देश्य किसी के खिलाफ संघर्ष खड़ा करना नहीं, बल्कि ब्राह्मण समाज के अधिकार, सम्मान, शिक्षा, आर्थिक स्थिति और सरकारी सहभागिता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखना है।अब नजर इस बात पर है कि ब्राह्मण कल्याण बोर्ड, संस्कृत शिक्षा के संरक्षण, EWS वर्ग के अवसर और सरकारी सहभागिता जैसी मांगों पर बिहार सरकार का क्या रुख सामने आता है।



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