मीरगंज नगर पंचायत में संपत्ति कर वसूली के विरोध में बिहार किसान मजदूर संघ की ओर से एक दिवसीय धरना दिया गया। धरने में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लेकर नगर पंचायत द्वारा लिए जा रहे टैक्स का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नगर पंचायत क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए टैक्स वसूली उचित नहीं है।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नगर पंचायत मीरगंज का जो परिसीमन किया गया है, उसके अधिकांश क्षेत्र में आज भी खेती होती है। यहां रहने वाले लोगों की प्रति व्यक्ति आय काफी कम है। ऐसे में गरीब और मध्यम वर्गीय जनता पर संपत्ति कर का अतिरिक्त बोझ डालना कहीं से भी जायज नहीं है। लोगों का कहना था कि अगर नगर पंचायत टैक्स के बदले क्षेत्र में पर्याप्त नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराती है तो वे टैक्स देने के लिए तैयार हैं।
वक्ताओं ने कहा कि नगर पंचायत बनने के बाद लोगों को बेहतर सड़क, नाला, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट और अन्य शहरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। जब क्षेत्र में अभी भी ग्रामीण जैसी स्थिति है और अधिकांश लोग खेती पर निर्भर हैं, तो नगर पंचायत का टैक्स लेना लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि नगर पंचायत बनाने के बजाय मीरगंज को प्रखंड का दर्जा दिया जाता तो क्षेत्र के लोगों के लिए अधिक उपयोगी होता।
विभागीय निर्देश के अनुसार लिया जा रहा संपत्ति कर : ईओ
इस संबंध में नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी दीपा कुमारी ने कहा कि विभागीय निर्देश के अनुसार संपत्ति कर की वसूली की जा रही है। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत बनने के समय क्षेत्र में माईर्किंग कराई गई थी और पंपलेट बांटकर लोगों को संपत्ति कर तथा संबंधित प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया गया था। उस समय किसी व्यक्ति ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी।
कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को संपत्ति कर को लेकर शिकायत या आपत्ति है तो वह विभाग को लिखित रूप से शिकायत कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर गलत तरीके से कर लगाया जा रहा है तो संबंधित व्यक्ति उन्हें आवेदन देकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। मामले की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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