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आंबेडकर प्रतिमा शिफ्ट करने की चर्चा पर गरमाया मामला, शाह फैसल बोले—उसी स्थान पर हो पुनर्स्थापना


कटिहार जिले के बारसोई अनुमंडल अंतर्गत सालमारी मुख्य मार्ग स्थित चौराहे पर लगी डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने की चर्चा के बाद मामला एक बार फिर गरमा गया है। कुछ दिनों पूर्व प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन द्वारा उसे वर्तमान स्थल से हटाकर अन्य जगह स्थापित किए जाने की बात सामने आई है। इसके विरोध में स्थानीय लोगों की ओर से लगातार बैठकें और आंदोलन की तैयारी की जा रही है।

प्राणपुर क्षेत्र के समाजसेवी एवं आईटीआई कॉलेज के निदेशक इंजीनियर शाह फैसल लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को उसी स्थान पर पुनः स्थापित किया जाए, जहां वह वर्षों से स्थापित थी। इसी मांग को लेकर गुरुवार को सालमारी में बैठक हुई, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और समाजसेवी शामिल हुए।

शाह फैसल ने अनुमंडल पदाधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने कई बार एसडीओ से मुलाकात कर सालमारी पहुंचकर स्थानीय लोगों की बात सुनने का आग्रह किया, लेकिन लगातार आश्वासन देकर मामले को टाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे इसी क्षेत्र के रहने वाले हैं और समाजसेवा से जुड़े हैं, इसलिए स्थानीय लोगों की भावनाओं और मांगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

बैठक में आजमनगर के अंचल अधिकारी भी पहुंचे। उनके पहुंचने पर शाह फैसल ने आभार जताया। उन्होंने बताया कि डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा 14 अप्रैल 1996 को यहां स्थापित की गई थी। उनका कहना है कि इतने लंबे समय से स्थापित प्रतिमा को किसी अन्य स्थान पर ले जाना स्थानीय लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ होगा।

शाह फैसल ने कहा कि प्रतिमा हटाने के निर्णय का वे हर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे। जरूरत पड़ी तो आंदोलन किया जाएगा और जेल जाने की स्थिति भी आई तो पीछे नहीं हटेंगे। स्थानीय नागरिकों ने भी उनकी मांग का समर्थन करते हुए प्रतिमा को पूर्व निर्धारित स्थल पर ही पुनः स्थापित करने की मांग की।

इस अवसर पर तारकेश्वर प्रसाद ठाकुर, भोला पासवान, भागीरथ सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर संविधान निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले महान व्यक्तित्व हैं। उनकी प्रतिमा के स्थान को लेकर स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

इंजीनियर शाह फैसल ने प्रतिमा को हटाने के पीछे ठेकेदारों की कथित मिलीभगत का भी आरोप लगाया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

फिलहाल प्रतिमा को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और बैठकों का दौर जारी है। लोगों ने प्रशासन से बातचीत के माध्यम से मामले का समाधान करने और प्रतिमा को उसी स्थान पर पुनः स्थापित करने की मांग की है।

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