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कुर्सेला में संदिग्ध नर्सिंग होम पर प्रशासन की सख्ती, छापेमारी से मचा हड़कंप


कुर्सेला प्रखंड क्षेत्र में बिना पर्याप्त कागजात और संदिग्ध तरीके से संचालित निजी नर्सिंग होम, बेबी केयर सेंटर एवं अन्य चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच टीम ने गुरुवार को कुर्सेला के विभिन्न इलाकों में अचानक छापेमारी कर कई निजी चिकित्सा संस्थानों की जांच की। प्रशासनिक कार्रवाई की भनक लगते ही संचालकों में हड़कंप मच गया। कुछ संचालक अपने प्रतिष्ठान बंद कर मौके से फरार हो गए, जबकि कई संस्थानों के संचालक जांच टीम के समक्ष जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

कुर्सेला प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमरलाल के नेतृत्व में गठित टीम ने नवाबगंज, कुर्सेला चौक, लंका टोला, मजदिया रोड सहित अन्य इलाकों में संचालित निजी चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण किया। टीम ने संस्थानों के पंजीकरण, संचालन की वैधता, चिकित्सकीय व्यवस्था, उपलब्ध सुविधाओं और आवश्यक दस्तावेजों की जांच की।

जांच के दौरान कई संचालकों से संस्थान के संचालन से संबंधित कागजात मांगे गए। पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाने वाले संस्थानों की जानकारी भी टीम ने दर्ज की। अचानक हुई कार्रवाई के कारण क्षेत्र में निजी चिकित्सा संस्थान संचालकों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।

शिकायतों के बाद शुरू हुआ जांच अभियान

बताया जा रहा है कि कुर्सेला क्षेत्र में लंबे समय से कई निजी नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर, जांच घर और अन्य चिकित्सा केंद्रों के नियमों के अनुरूप संचालन नहीं किए जाने की शिकायतें प्रशासन को मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने निजी चिकित्सा संस्थानों की जांच का अभियान शुरू किया है।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमरलाल ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश पर जांच अभियान चलाया जा रहा है। क्षेत्र में संचालित संदिग्ध नर्सिंग होम एवं अन्य चिकित्सा संस्थानों के दस्तावेज और संचालन व्यवस्था की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित निजी चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण किया जाएगा।

प्रशासन की इस लगातार कार्रवाई से बिना पर्याप्त कागजात के संस्थान संचालित करने वालों में हड़कंप है। वहीं स्थानीय लोगों ने भी अभियान को नियमित रूप से जारी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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