बिहार में 11 नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बसाने की तैयारी तेज हो गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत जमीन मालिकों (रैयतों) को दो विकल्प दिए जाएंगे—पहला, लैंड पूलिंग में शामिल होकर टाउनशिप में हिस्सेदारी लेना और दूसरा, जमीन के बदले आकर्षक मुआवजा प्राप्त करना। नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि इन टाउनशिप के लिए खाता-खेसरा सहित प्रारूप का प्रकाशन इसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर तक कर दिया जाएगा। सरकार पटना, पूर्णियां, दरभंगा, छपरा, सोनपुर, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, सीतामढ़ी, मुंगेर एवं सहरसा में टाउनशिप बनाने जा रही हैं, इसको लेकर मार्च 2027 तक इन जिलों के जमीन के खरीद बिक्री पर रोक लगा रखी हैं।
सरकार इन टाउनशिप को दो मॉडल के तहत विकसित करेगी।
पहले मॉडल में लैंड पूलिंग के जरिए संबंधित एजेंसी अस्थायी रूप से जमीन लेगी, उसे विकसित करेगी और फिर जमीन मालिकों को हिस्सेदारी के साथ वापस कर देगी। इस योजना में बिहार सरकार ने 55% हिस्सेदारी तय की है, जो अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है। आमतौर पर विकसित क्षेत्र में 30-40% जमीन ही वापस मिलती है।
छोटे रैयतों के लिए मुआवजा विकल्प
जिन जमीन मालिकों के पास कम भूमि है या जो लैंड पूलिंग में शामिल नहीं होना चाहते, उनके लिए बाजार दर पर मुआवजा और अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा। यह इंसेंटिव टीडीआर (ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट्स) के रूप में मिलेगा। अधिकारियों का दावा है कि मुआवजा जमीन की कीमत का पांच गुना तक हो सकता है, जो सामान्य भूमि अधिग्रहण से अधिक है।
निवेश और रोजगार के अवसर
सरकार के अनुसार, इन टाउनशिप में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा। अलग-अलग क्षेत्रों में एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल पार्क और फिल्म सिटी जैसी परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सुनियोजित चयन और कनेक्टिविटी
इन टाउनशिप के लिए चयनित स्थानों को गहन अध्ययन के बाद चुना गया है। इन्हें निकटवर्ती शहरों से लगभग आधे घंटे की दूरी पर विकसित किया जाएगा और प्रस्तावित हाइवे से जोड़ा जाएगा। साथ ही बाढ़ जैसे जोखिमों को ध्यान में रखकर स्थान तय किए गए हैं। पूर्णियां में टाउनशिप को पटना-पूर्णियां ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और खगड़िया-पूर्णियां एनएच 31 से जोड़ा जाएगा। शहरों को दार्शनिक व पर्यटन स्थल से जोड़ा जाएगा। इसमें पूर्णियां पूर्व और के.नगर प्रखंड के 49 गाँव आ रहे हैं। यह टाउनशिप 27,374 एकड़ में विकसित होगा।
पारदर्शिता और जमीन पर रोक
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जमीन अधिग्रहण और लैंड पूलिंग की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानून के दायरे में होगी। जिन गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई है, वह स्थानीय लोगों के हित में है ताकि उनकी जमीन सस्ते दामों में न खरीदी जा सके और योजना सुचारु रूप से लागू हो सके। सरकार का दावा है कि इस योजना से किसी भी जमीन मालिक को नुकसान नहीं होगा और राज्य के शहरी विकास को नई गति मिलेगी।
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