पूर्णियाँ/सिटीहलचल न्यूज़
बैसा प्रखंड क्षेत्र के आशा कार्यकर्ताओं एंव आशा फैसिलिटेटर ने शुक्रवार को उपस्वास्थ्य केंद्र सिरसी के प्रांगण में धरना दिया एवं अपनी मांगों के समर्थन में नारे भी लगाए। इस दौरान वक्ताओं ने धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सरकार से कहा कि 2005 से ही हम लोग आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन सरकार इस पर विचार नहीं कर रही है। सरकार को यह सोचना चाहिए कि आशा और आशा फैसिलिटेटर सेवानिवृत्त हो जाएंगी तो क्या करेंगी। जबकि स्वास्थ्य मंत्री ने पूर्व में घोषणा की थी कि आशाओं का मानदेय बढ़ाया जाएगा। वक्ताओं ने बिहार सरकार से मांग की कि आशा को सरकारी सेवक घोषित किया जाए
जब तक सरकारी सेवक नहीं घोषित किया जाता है । तब तक हड़ताल जारी रहेगा। कहा कि अगर सरकार मांगों को पूरा नहीं करती है तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज करेंगी । जिसकी जवाबदेही स्वास्थ्य प्रशासन की होगी। आखिर हम सभी कब तक सरकारी कर्मी व समान वेतन की आस में बैठे रहेंगे। सरकार आशा कार्यकर्ताओं के साथ गलत नीति अपना रही है। हमलोगों की मांग पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।कहा कि यह आंदोलन राज्य एवं केंद्र सरकार के खिलाफ है। केंद्र सरकार के नौ वर्षों के शासन में हमें न्याय नहीं मिला
पटना उच्च न्यायालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना के दौरान आशा कार्यकर्ता के कार्यों की सराहना की है। जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हड़ताल जारी रहेगी।आशा को राज्यकर्मी का दर्जा देने, आशा और फैसिलिटेटर को 10 हजार मासिक वेतन, कोरोना महामारी में मृत आशा कार्यकर्ताओं के स्वजन को चार लाख रुपये का मुआवजा, पेंशन योजना बहाल करने के साथ अन्य मांगों पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि हड़ताल पर जाने की पूरी जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार हमारी मांगों पर अब तक चुप है।



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