किशनगंज /राजेश दुबे
बिहार के किशनगंज में चालू होने से पूर्व एक और पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत गंभीर गढ़ के निकट एनएच 327ई पर निर्माणाधीन पुल का पिलर धंस जाने के बाद सड़क व पुल निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। मालूम हो की सुखानी थाना क्षेत्र अंतर्गत गौरी गांव का मामला है। जहाँ निर्माणाधीन एनएच 327ई सड़क पर मैची नदी पर बना पुल बीच से धंस गया है। पहली बरसात में ही पुल के इस तरह से धंस जाने के कारण निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे है। मालूम हो की ध्वस्त पुल छह स्पेन का है जो की बीच से धंस गया है। जबकि अभी नदी में नाम मात्र का ही पानी है।
गौरतलब हो की 1564 करोड़ की लागत से अररिया गलगलिया 94 किलोमीटर फोर लेन सड़क का निर्माण जी आर इंफ्रा स्ट्रक्चर कंपनी के द्वारा किया जा रहा है। 94 किलोमीटर इस सड़क पर दर्जनों स्थानों पर कंपनी के द्वारा छोटे और बड़े पुल का निर्माण किया गया है। स्थानीय निवासी बछराज नखत ने कहा की सामरिक दृष्टि कोण से यह सड़क अत्यधिक महत्वपूर्ण है बावजूद इसके जीआर कंपनी के द्वारा गुणवत्ता का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा की काम के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति की जा रही है जिसका नतीजा सामने है की पुल पर आवागमन शुरु होने से पहले ही पिलर धंस गया। वही स्थानीय ग्रामीण राजीव सिन्हा ने बताया की पुल का तीसरा नंबर पिलर धंस गया है और निर्माण एजेंसी पर कारवाई की जानी चाहिए। वही ग्रामीणों ने कहा की अगर सही तरीके से जांच करवाया जाए तो निर्माण कार्य में जिस तरह धांधली किया जा रहा है उसका पोल खुल जायेगा। इस संबंध में जब मौके पर मौजूद एक कर्मी से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। इधर मामला संज्ञान में आने के बाद जिला पदाधिकारी ने एनएचएआई के अधिकारियों को जांच का निर्देश दिया है साथ ही मामले की सूचना भारत सरकार को भी भेजी गई है। डीएम श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि मामला काफी दुखद है और इसकी जांच करवाई जा रही है। उन्होंने कहा की जांच रिपोर्ट आने के बाद कारवाई की जाएगी ।
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तेजस्वी यादव ने कहा यह केंद्र सरकार की लापरवाही है
तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर लिखा है कि 'यह केंद्र सरकार अधीन भारत माला परियोजना अंतर्गत एनएचआई द्वारा निर्मित निर्माणाधीन पुल है। इसका बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग से कोई संबंध नहीं है। इस परियोजना के निर्माण से संबंधित एजेंसी और अधिकारियों को श्रेय एवं दंड देने का सर्वाधिकार एनएचआई का है।



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