बैसा/सिटी हलचल न्यूज़
पूर्णियाँ: एआईएमआईएम पार्टी के प्रदेश महासचिव सह जमीयत उलेमा ए हिन्द बैसा के प्रखंड अध्यक्ष हाजी नाहीद गनी ने क्षेत्र वासियों को ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व की हार्दिक मुबारकबाद दी है तथा साम्प्रदायिक सदभाव व सौहार्दपूर्ण माहोल में बकरीद का पर्व मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि इस्लाम धर्म में त्याग की पवित्र भावना का पर्व ईद उल-अजहा (बकरीद) है । यह पर्व मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है । इस पर्व का संबंध कुबार्नी से है । कुबार्नी का असल अर्थ ऐसे बलिदान से है जो दूसरों के लिए दिया गया हो। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार बकरीद रमजान का पाक महीना खत्म होने के लगभग 70 दिनों बाद मनाया जाता है
इस पर्व में खुदा की राह में कुरबानी का जज्बा और इन्सानियत के लिए दुआएं शामिल हैं। इस दिन एक बकरे को खुदा के लिए कुरबान कर दिया जाता है। मान्यता है कि बकरीद पर्व की शुरूआत हजरत इब्राहीम से हुई थी जो कि अल्लाह के पैगम्बर थे। कहते हैं कि एक बार फरिश्तों के कहने पर अल्लाह ने हजरत इब्राहीम का इम्तहान लिया। इससे पहले हजरत इब्राहीम के यहां बड़ी दुआ के बाद एक बेटे ने जन्म लिया था। एक बार हजरत इब्राहिम को ख्वाब में हुक्म मिला कि वे अल्लाह ही राह में त्यागकुबार्नी करें
उन्होंने उस फर्ज को निभाया। दूसरी रात को भी वैसा ही ख्वाब आया तो उन्होंने सुबह होते ही अपना कर्म किया तीसरी रात में हजरत इब्राहिम को हुक्म हुआ कि वो सबसे प्रिय चीज को अल्लाह की राह में कुर्बान करे। निश्चित तौर पर किसी व्यक्ति को अपना बेटा सबसे ज्यादा प्यारा होता है। हजरत इब्राहीम ने अपना फर्ज निभाने के लिए अपने बेटे इस्माइल की कुबार्नी देने के लिए तैयार हो गये। बकरीद का पर्व हमें त्याग और बलिदान की शिक्षा देता है जिस पर हमें अमल करना चाहिए।



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