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कहां गया है जिन्होंने माना समाज को अपना परिवार , उसकी जिंदगी रहा हमेशा खुशहाल

पूर्णियां/बालमुकुन्द यादव 

पूर्णियां : जी हां यह कहावत है हैना सईद एवं रविंद्र कुमार साह के लिए जिन्होंने ईद जैसे पर्व के बावजूद भी रात के 9:00 बजे बस स्टैंड से सच्चिदानंद बाबू का फोन आता है की बस स्टैंड पर एक बूढ़े बुजुर्ग बहुत ही बुरी अवस्था में पड़ा हुआ है इसका कुछ मदद करो ।रविंद्र कुमार साह ने बिना समय बताएं बिताए वहां पहुंचता है उसकी स्थिति को देखकर हेना सईद को फोन करता है हैना सईद तुरंत वहां पहुंचती है


और उस बुरे बाबा को पाने कार मे लेकर के रविंद्र कुमार साह के घर पहुंचते हैं रात में बाबा को सुरक्षित घर में रखा जाता है सुबह खुद से स्नान कराकर नए कपड़े पहना कर अस्पताल में जांच करा कर वृद्धाश्रम तक पहुंचा करके वापस आता है। आप देख सकते हैं जब  लावारिस पिता रोड पर थे और वही पिता जब वारिस बन गए तो कितना फर्क आ गया

यह हम सबको सोचना चाहिए कि अपने मां बाप का सेवा सबके घर पर ही है इसलिए पहले मां बाप का सेवा करें फिर देवी देवताओं का पूजा करें वरना कितना भगवान का पूजा करिएगा कोई फर्क या कोई फल नहीं मिलेगा धन्यवाद

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