पूर्णिया से विकास कुमार झा कि रिपोर्ट
पूर्णिया सदर थाना में दर्ज मामले में थाना द्वारा अपने तरीके से राजनीति से प्रेरित होकर काम किया जाता है। थाना में दर्ज एक ही मामला एक ही धारा में दर्ज अलग अलग मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज देती है, वहीं दूसरे आरोपी को 10 दिन गुजर जाने के बाद भी गिरफ्तार नहीं कर रही है।
मामला गुलाबबाग के विश्वनाथ अग्रवाल से जुड़ा हुआ है, जिसपर कृषि पदाधिकारी द्वारा खाद कालाबाजारी से लेकर 420 का केस दर्ज (कांड संख्या 13/2022) कराया है। कोरोना काल मे सरकार का स्पस्ट निर्देश है कि आवश्यक वस्तु का कोई कालाबाजारी नहीं कर सकता, मगर खाद माफिया विश्वनाथ अग्रवाल द्वारा उर्बरक का खुलेआम कालाबाजारी किया जा रहा था, इसलिए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत इसपर केस भी दर्ज कराया गया है। जिसमे तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है और 7 साल तक का सजा का भी प्रावधान है। मगर इतने संगीन धारा के बाबजूद सदर थाना पुलिस खाद माफिया को गिरफ्तार नहीं कर रही है।
वहीं आपको निरंजन कुशवाहा प्रकरण याद होगा, जिसमे आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ था, जिसमे बिना समय गवाए 2 लोगो को गिरफ्तार कर सदर थाना पुलिस ने जेल भेज दिया था। अब सवाल यह उठता है कि पुलिस यह दोहरी नीति क्यों अपना रही है?
मालूम हो कि खाद माफिया विश्वनाथ अग्रवाल और उसके पुत्र द्वारा लगातार खुदरा बिक्रेताओं को गाली गलौज और अपमानित करता आया है। यहाँ तक कि इसका मनोबल इतना बढ़ गया था कि नेताओ के नाम से अधिकारियों को डराता था। शायद यही वजह हो कि उक्त राजनेता के डर से सदर थाना पुलिस भी खाद माफिया विश्वनाथ अग्रवाल पर हाथ डालने से डर रही हो?
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