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रौनिया पंचायत में योजनाओं के भुगतान पर सवाल, पीआरएस पर 10 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप



बरारी प्रखंड की रौनिया पंचायत में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और भुगतान व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। भारतीय मत्स्य व्यापार परिषद के कटिहार जिला अध्यक्ष सह भाजपा युवा मोर्चा के बरारी प्रखंड महामंत्री अंकित कुमार चौहान ने पंचायत के पीआरएस अशोक कुमार पर प्राक्कलित राशि का 10 प्रतिशत तक कमीशन मांगने, पुराने कार्यों को नई योजना में दिखाकर राशि निकासी करने और काम पूरा होने के बावजूद भुगतान लंबित रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने जिलाधिकारी और डीडीसी से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

**फर्जी हाजिरी से निकासी का आरोप**

अंकित चौहान ने आरोप लगाया कि वीबी-जी राम जी योजना के तहत मजदूरों की कथित फर्जी हाजिरी दर्ज कर सरकारी राशि की निकासी की जा रही है। उन्होंने मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति और भुगतान अभिलेखों की जांच कराने की मांग की। उनका दावा है कि विरोध करने पर उनकी पत्नी की मेट आईडी डिलीट कर दी गई। उन्होंने कथित वसूली से संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग और निर्माण सामग्री की पक्की-कच्ची रसीदें उपलब्ध होने की बात भी कही है।

**प्लांटेशन का भुगतान लंबित, छठ घाटों की गुणवत्ता पर सवाल**

अंकित ने पंचायत में 400 यूनिट से अधिक प्लांटेशन कराने का दावा करते हुए कहा कि कुछ चुनिंदा लोगों को ही भुगतान किया जा रहा है, जबकि अन्य लोग अपनी मजदूरी के लिए इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि करीब पांच महीने पहले पूरा कराए गए कार्य का मटेरियल वाउचर अब तक नहीं लगाया गया है। मजदूरों को भुगतान करने के लिए उन्हें दूसरे स्रोतों से पैसे जुटाने पड़ रहे हैं।

उन्होंने पंचायत में बने तीन छठ घाटों के निर्माण पर भी सवाल उठाए। आरोप है कि निर्माण के एक साल के भीतर ही घाट जर्जर हो गए और पुरानी सड़क से उखाड़ी गई ईंटों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए तकनीकी जांच जरूरी है।
आवास-पशु शेड के नाम पर वसूली का भी दावा

अंकित चौहान ने आरोप लगाया कि पंचायत में कुछ लोगों से आवास और पशु शेड बनवाने के नाम पर पैसे लिए गए, लेकिन काम नहीं कराया गया। उनके अनुसार, करीब दो महीने पहले डीआरडीए के निदेशक ने उनके कराए गए कार्य की जांच कर उसे पूर्ण पाया था, फिर भी भुगतान लंबित है। उन्होंने कहा कि बकाया राशि के कारण वे कर्ज के बोझ में दब गए हैं।

अंकित ने डीएम और डीडीसी से सभी संबंधित योजनाओं के मस्टर रोल, भुगतान विवरण, निर्माण सामग्री के बिल-वाउचर, प्लांटेशन और छठ घाटों की गुणवत्ता की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई तथा लंबित भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।

पीआरएस अशोक कुमार और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का जवाब और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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