पूर्णिया। पूर्णिया के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) परिसर में रविवार को समाचार संकलन कर रहे तीन पत्रकारों के साथ कथित तौर पर मारपीट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि छेड़खानी की घटना की कवरेज कर रहे पत्रकारों पर पहले अभद्र टिप्पणी की गई और देखते ही देखते करीब 25 से 30 युवकों ने उन पर हमला बोल दिया। पत्रकारों को बचाने पहुंची पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम के साथ भी हाथापाई किए जाने और टीम का मोबाइल छीनने का प्रयास करने का आरोप है। मामले ने GMCH की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छेड़खानी के बाद शुरू हुई कहानी, पत्रकारों ने शुरू की कवरेज
जानकारी के अनुसार, GMCH परिसर में एक युवती के साथ कुछ युवकों द्वारा कथित छेड़खानी की घटना के बाद मरीज के परिजनों और अस्पताल के गार्ड ने एक युवक की पिटाई कर दी। इसी दौरान परिसर में मौजूद पत्रकारों ने घटना का समाचार संकलन और वीडियो बनाना शुरू किया। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ मेडिकल के छात्रों ने पत्रकारों पर अभद्र टिप्पणी की। पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि आखिर छेड़खानी करने वाले के फोटो-वीडियो बनाने पर उन्हें आपत्ति क्यों है, विवाद बढ़ गया।
स्थिति बिगड़ती देख मौके पर पूर्णिया एसएसपी द्वारा गठित क्विक रिस्पॉन्स टीम पहुंची और कथित मनचले युवक को हिरासत में ले लिया।
QRT के जाते ही बढ़ा बवाल!
आरोप है कि घटना के कुछ ही देर बाद करीब 25 से 30 युवक मौके पर पहुंच गए और तीनों पत्रकारों को घेरकर मारपीट शुरू कर दी। पत्रकारों के साथ मारपीट होते देख क्विक रिस्पॉन्स टीम ने उन्हें बचाने का प्रयास किया तो उपद्रवी युवकों ने पुलिस टीम से भी हाथापाई शुरू कर दी।
इतना ही नहीं, जब QRT के जवानों ने घटना का वीडियो बनाने का प्रयास किया तो उनका मोबाइल फोन भी छीनने की कोशिश की गई। यानी जिस टीम को कानून-व्यवस्था संभालने के लिए बनाया गया था, उसी टीम के साथ कथित तौर पर हाथापाई और मोबाइल छीनने का प्रयास किए जाने से पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।
थाना के सामने पत्रकारों की हुई पिटाई, थाना बना मूकदर्शक
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह पूरा घटनाक्रम GMCH परिसर में बने नए टीओपी के सामने होने के बावजूद पत्रकारों को तत्काल सुरक्षा क्यों नहीं मिल सकी?
पीड़ित पत्रकारों का आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें मौके से निकलने का मौका भी नहीं दिया। जब पत्रकारों ने बचकर निकलने की कोशिश की तो उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया।
बाद में पत्रकारों ने सदर डीएसपी को फोन कर मदद मांगी, लेकिन उनका आरोप है कि तत्काल मौके पर पर्याप्त मदद नहीं पहुंची।
डायल-112 की टीम ने भी पत्रकारों को नही बचाया
मारपीट के दौरान पत्रकारों को कुछ देर बाद डायल-112 की टीम आती दिखाई दी। पीड़ित पत्रकारों के अनुसार, उन्होंने टीम से मदद मांगी, लेकिन आरोप है कि टीम ने किसी दूसरे काम से आने की बात कहकर वहां तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया। अब इस पूरे मामले में यह सवाल उठ रहा है कि अगर अस्पताल परिसर में पत्रकारों पर खुलेआम हमला हो रहा था, पुलिस टीम के साथ भी हाथापाई की स्थिति बन रही थी, तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सभी हमलावर का चेहरा सीसीटीवी में कैद
घटना के बाद जब मारपीट करने वाले युवकों की पहचान मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों के रूप में होने की बात सामने आई तो मामला और गंभीर हो गया।
पीड़ित पत्रकारों ने करीब 20 छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आवेदन दिया है।
घटना के लगभग तीन घंटे बाद सदर एसडीपीओ अभिनव परासर और डॉ. हरिशंकर मिश्र मौके पर पहुंचे। इसके बाद पत्रकारों से लिखित आवेदन लेकर मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
सबसे बड़ा सवाल—आखिर पत्रकारों की कवरेज से छात्रों को क्या आपत्ति थी? पूरे घटनाक्रम में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या जिस युवक पर छेड़खानी का आरोप लगा, वह मेडिकल कॉलेज का छात्र था?
अगर वह मेडिकल कॉलेज का छात्र नहीं था, तो उसके खिलाफ हुई कार्रवाई और घटना का वीडियो बनाने पर कथित तौर पर कुछ छात्रों को आपत्ति क्यों हुई?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
शाम होते ही GMCH में सक्रिय होते हैं दलाल? उठ रहे गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों और अस्पताल से जुड़े लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि शाम के बाद GMCH परिसर में बाहरी लोगों और कथित निजी अस्पताल के दलालों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। ये लोग मरीजों और उनके परिजनों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में ले जाते है।
अब यह भी जांच का विषय है कि शनिवार की घटना में शामिल युवक कौन थे, उनका मेडिकल कॉलेज से क्या संबंध था और क्या उनका किसी निजी अस्पताल या कथित दलाल नेटवर्क से कोई संबंध है। वही पूरा घटनाक्रम अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरा में कैद हो गया हैं। सभी छात्रों का चेहरा भी सीसीटीवी में कैद हो गया है।।
पत्रकारों ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
मारपीट की घटना के बाद पत्रकारों में भारी आक्रोश है। पीड़ित पत्रकारों और पत्रकार समुदाय ने आरोपियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पत्रकारों का कहना है कि यदि निर्धारित समय में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपने स्तर से कानूनी कार्रवाई करेंगे। वही अब निगाहें पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—GMCH जैसे संवेदनशील परिसर में पत्रकारों पर हमला करने की हिम्मत आखिर किसके भरोसे हुई? और अगर पुलिस की QRT भी मौके पर मौजूद थी, तो 25-30 युवकों की भीड़ इतनी देर तक कैसे हावी रही? फिर नया टीओपी थाना और क्विक रिस्पॉन्स टीम बनाने का क्या औचित्य रहा।
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