पूर्णिया मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH) में पत्रकार के साथ हुई कथित मारपीट की घटना को लेकर जिले में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। घटना के विरोध में बुधवार को मीरगंज में किसान मजदूर संघ एवं मीरगंज को प्रखंड बनाने की मांग को लेकर गठित संघर्ष समिति के बैनर तले विशाल कैंडल एवं मशाल जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए पत्रकार पर हमला करने वाले आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की।
जुलूस में बड़ी संख्या में छात्र, नौजवान, समाजसेवी, शिक्षाविद और स्थानीय लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मशाल और कैंडल लेकर पत्रकारों की सुरक्षा तथा घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आवाज बुलंद की।
मीरगंज प्रखंड बनाओ संघर्ष समिति के संयोजक रौशन राही ने पत्रकार के साथ हुई कथित मारपीट की घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। वे समाचार संकलन के लिए कई बार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं और आम लोगों की समस्याओं को प्रशासन तथा समाज के सामने लाने की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी गंभीर मामला है।
पिता की मौत के बाद बढ़ा आक्रोश
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि घटना के बाद पत्रकार अविनाश कुमार लड्डू कुमार के पिता की सदमे में मौत की बात सामने आने से जिले भर में आक्रोश और बढ़ गया है। उनका आरोप है कि मामले में प्रशासनिक कार्रवाई में देरी होने से लोगों में नाराजगी है।
किसान मजदूर संघ के प्रेम लाल मेहता और मंचित मेहता समेत अन्य लोगों ने भी घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
संयुक्त जांच कमेटी बनाने की मांग
आंदोलनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक संयुक्त कमेटी गठित करने की मांग की। उनका कहना है कि कमेटी में मेडिकल कॉलेज के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकारों और समाजसेवियों को शामिल किया जाए।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, कमेटी घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपे, ताकि किसी भी पक्ष के प्रभाव के बिना निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल
मशाल जुलूस में शामिल लोगों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि घटना के दिन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का रवैया संतोषजनक नहीं था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन और प्राचार्य का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
पूर्व की घटनाओं का भी उठाया मुद्दा
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि मेडिकल कॉलेज के छात्रों से जुड़े विवादों और कथित मारपीट की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। आरोप लगाया गया कि कभी मेडिकल कॉलेज का गेट बंद करने को लेकर मरीजों के परिजनों से विवाद तो कभी अन्य लोगों के साथ कथित मारपीट की शिकायतें सामने आई हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि पूर्व की घटनाओं में समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती थी।
छात्रों के अनुशासन पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं के अनुशासन को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ छात्र देर रात तक सार्वजनिक स्थानों पर घूमते हैं और अनुशासनहीनता से संबंधित शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्रदर्शनकारियों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से छात्रों के आचरण और अनुशासन पर प्रभावी निगरानी रखने की मांग की है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मशाल जुलूस में शामिल लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में जल्द और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल पत्रकारों का मामला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, संस्थागत अनुशासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
मशाल जुलूस में कैलाश बिहारी चौधरी, आलोक कुमार, सुशांत कुमार सिंह, गोपाल कुमार, जलज नयन, संतोष ठाकुर, आशीष सिंह, सोनू झा, अमजद आलम, नूरुल आलम, मंचित मेहता समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि पत्रकार के साथ हुई कथित मारपीट के मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है।
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