सहरसा-मानसी रेलखंड पर बुधवार की सुबह एक बड़ा रेल हादसा उस समय टल गया, जब पूर्णिया कोर्ट से हटिया जा रही गाड़ी संख्या 18625 कोसी सुपर एक्सप्रेस के एम-2 कोच के नीचे अचानक आग लग गई। ट्रेन उस वक्त पटरी पर दौड़ रही थी और कोच के नीचे से धुआं और आग निकल रहा था। समय रहते गेटमैन की नजर पड़ने और सूचना दिए जाने से ट्रेन को सिमरीबख्तियारपुर स्टेशन पर रोककर आग पर काबू पाया गया। यदि समय रहते आग का पता नहीं चलता तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना बुधवार सुबह की है। जानकारी के मुताबिक कोसी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब एक घंटे से अधिक की देरी से सिमरीबख्तियारपुर पहुंची। रानीबाग ढाला के पास तैनात गेटमैन सुदीन कुमार की नजर ट्रेन के एम-2 कोच के नीचे से निकल रहे घने धुएं और आग पर पड़ी। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना सिमरीबख्तियारपुर स्टेशन अधीक्षक को दी।
ट्रेन जब स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक पर पहुंचकर रुकी तो स्थिति और भयावह नजर आई। कोच के नीचे पहिए के पास से आग की लपटें निकल रही थीं और ब्रेक का हिस्सा अत्यधिक गर्म होकर लाल हो चुका था। प्रत्यक्ष स्थिति को देखकर यात्रियों में हड़कंप मच गया।
आग की लपटें देख यात्रियों में मची अफरा-तफरी
ट्रेन के रुकते ही रेलवे कर्मचारियों ने सबसे पहले एम-2 कोच में सवार यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। यात्रियों को दूसरे कोचों में शिफ्ट किया गया, ताकि आग की स्थिति बिगड़ने पर किसी तरह का जान-माल का नुकसान न हो।
रेलवे कर्मियों ने उपलब्ध अग्निशमन यंत्रों से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। बताया गया कि करीब छह फायर एक्स्टिंग्विशर का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद स्थानीय दमकल टीम को भी मौके पर बुलाया गया। फायर ब्रिगेड की टीम ने करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया।
रेलवे की प्रारंभिक तकनीकी जांच में सामने आया कि ब्रेक ब्लॉक जाम होने के कारण अत्यधिक घर्षण पैदा हुआ, जिससे ब्रेक पैड गर्म होकर जलने लगा। इसी वजह से कोच के पहिए के पास आग और धुआं दिखाई देने लगा।
फायर ब्रिगेड के फायरमैन संतोष कुमार के मुताबिक, सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची तो बोगी के नीचे ब्रेक पैड अत्यधिक गर्म होकर लाल हो चुका था और वहां से धुआं तथा आग निकल रही थी। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पूरी तरह बुझाई गई।
43 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही ट्रेन
कोसी एक्सप्रेस सुबह करीब 5:30 बजे सिमरीबख्तियारपुर स्टेशन पहुंची थी। आग बुझाने और तकनीकी जांच के बाद ट्रेन को सुबह 6:13 बजे आगे के लिए रवाना किया गया। इस तरह ट्रेन करीब 43 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही।सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित एसी कोच के यात्रियों को आगे की यात्रा के लिए दूसरे कोच में शिफ्ट किया गया। इसके बाद तकनीकी टीम ने आवश्यक जांच और व्यवस्था पूरी करने के बाद ट्रेन को रवाना किया। इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि ट्रेन के स्टेशन पहुंचने से पहले ही गेटमैन की नजर कोच के नीचे से निकल रहे धुएं पर पड़ गई। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना रेल अधिकारियों को दी। यही सतर्कता हादसे को गंभीर रूप लेने से रोकने में अहम साबित हुई।
चलती ट्रेन के कोच के नीचे आग लगना बेहद गंभीर स्थिति थी। अगर धुआं और आग समय रहते नहीं पकड़ी जाती तो आग कोच के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकती थी और यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।
12 दिन के भीतर दूसरी घटना, रेलवे सुरक्षा पर उठे सवाल
सिमरीबख्तियारपुर स्टेशन पर इतनी कम अवधि में ट्रेन में आग लगने की यह दूसरी बड़ी घटना सामने आई है। इससे पहले 3 अगस्त 2026 को प्लेटफॉर्म संख्या-2 पर खड़ी समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर मेमू ट्रेन संख्या 63344 के इंजन में भीषण आग लग गई थी। उस घटना में ट्रेन का मोटर कोच पूरी तरह जल गया था। हालांकि उस समय भी किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं थी।
अब करीब 12 दिन बाद कोसी एक्सप्रेस के कोच के ब्रेक पैड में आग लगने की घटना ने रेलवे की तकनीकी जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार दो घटनाओं के बाद यात्रियों के बीच भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
डीआरएम बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई
समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर ब्रेक में आई तकनीकी समस्या के कारण पहिए में आग लगने की बात सामने आई है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि इस घटना में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। गेटमैन की सतर्कता, रेलवे कर्मचारियों की तत्काल कार्रवाई और दमकल टीम की तत्परता से एक संभावित बड़े रेल हादसे को समय रहते टाल दिया गया।
पूर्णिया कोर्ट से हटिया जाने वाली 18625 कोसी सुपर एक्सप्रेस का यह हादसा एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया है कि आखिर चलती ट्रेनों में ब्रेक और पहियों की तकनीकी जांच कितनी प्रभावी तरीके से की जा रही है।
Post a Comment