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बहादुरगंज में हालिया विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं पर कांग्रेस विधायक कमरुल होदा ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों को जेल भेजा जा रहा है तो इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है, क्योंकि संविधान सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए तथा मर्यादा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।
विधायक ने कहा कि लोग अपनी मांगों को लेकर जितना चाहें विरोध-प्रदर्शन करें, लेकिन किसी भी परिस्थिति में हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या तोड़फोड़ का सहारा नहीं लेना चाहिए। उन्होंने बहादुरगंज में हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि युवा सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ करते हैं या प्रशासनिक अधिकारियों पर हमला करते हैं, तो यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। ऐसी घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और लोकतांत्रिक आंदोलनों की गरिमा को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
गौरतलब है कि गुरुवार को बहादुरगंज में प्रदर्शन के दौरान उपद्रवी तत्वों द्वारा पुलिस पर पथराव किया गया था, जिसमें कई पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल हो गए थे।
कमरुल होदा ने युवाओं से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन का उद्देश्य जनहित के मुद्दों को उठाना होना चाहिए, न कि हिंसा या अराजकता फैलाना। उनके अनुसार लोकतंत्र में संवाद और शांतिपूर्ण विरोध ही सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
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