प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हर साल लाखों छात्र अपने घर-परिवार से दूर कोटा जैसे शहरों का रुख करते हैं। माता-पिता अपने सपनों और उम्मीदों को पूरा करने के लिए बच्चों पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन कई बार यही उम्मीदें और प्रतिस्पर्धा का दबाव युवाओं को ऐसी राह पर ले जाता है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होती। बिहार के आरा से सामने आया एक ऐसा ही मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां NEET की तैयारी कर रहा छात्र पढ़ाई और सांसारिक मोह-माया छोड़कर वृंदावन में बैरागी जीवन जीने चला गया। सबसे मार्मिक बात यह है कि उसकी तलाश में गया उसका छोटा भाई भी संतों के संपर्क में आकर साधु बन गया। अब दोनों बेटों के बैरागी बनने से मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
नगर थाना क्षेत्र के शीतल टोला निवासी कुमार विशाल का पुत्र सिद्धांत विशाल राजस्थान के कोटा में रहकर प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान से NEET की तैयारी कर रहा था। पिछले वर्ष परीक्षा देने के बाद वह रिजल्ट का इंतजार कर रहा था। इसी बीच 14 जून की सुबह करीब चार बजे वह घर से टहलने की बात कहकर निकला और फिर कभी वापस नहीं लौटा।
बेटे की तलाश में दर-दर भटकता रहा परिवार
सिद्धांत के अचानक गायब होने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता ने रिश्तेदारों, दोस्तों और संभावित सभी स्थानों पर उसकी तलाश की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार 17 जून को नगर थाना में गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और विभिन्न स्रोतों की मदद से उसकी तलाश शुरू की।
तलाश में गया छोटा भाई भी साधु बन गया
मामले ने उस समय और भी चौंकाने वाला मोड़ ले लिया जब सिद्धांत की तलाश में उसका छोटा भाई वृंदावन पहुंचा। वहां संतों के संपर्क में आने के बाद उसने भी सांसारिक जीवन छोड़ बैरागी मार्ग अपना लिया और आश्रम में रहने लगा। देखते ही देखते परिवार के दोनों बेटे गृहस्थ जीवन से दूर होकर साधु जीवन की राह पर चल पड़े।
वृंदावन में संत के साथ रह रहा था सिद्धांत
जांच के दौरान पुलिस को तकनीकी इनपुट और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर पता चला कि सिद्धांत वृंदावन में एक संत के साथ रह रहा है। इसके बाद दारोगा परिणीती कुमारी के नेतृत्व में पुलिस टीम उत्तर प्रदेश के वृंदावन पहुंची। वही पुलिस के पहुंचने पर संबंधित संत ने पहले सिद्धांत को सौंपने से इनकार कर दिया। काफी समझाइश, कानूनी प्रक्रिया और बातचीत के बाद संत ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद पुलिस उसे सुरक्षित आरा लेकर लौट आई।
'अब मैं बैरागी जीवन जीना चाहता हूं'
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सिद्धांत फिलहाल पढ़ाई और सामान्य पारिवारिक जीवन में लौटने की बजाय बैरागी जीवन जीने की इच्छा जता रहा है। उसका कहना है कि वह सांसारिक मोह-माया से दूर रहकर आध्यात्मिक मार्ग पर चलना चाहता है। अब इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया और उसके बयान के आधार पर आगे बढ़ेगा।
मां की आंखें आज भी बेटों की राह देख रही हैं
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे भावुक पहलू परिवार की पीड़ा है। जिन माता-पिता ने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था, आज उनके दोनों बेटे बैरागी जीवन की राह पर निकल चुके हैं। बेटे की याद में मां का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि दोनों बेटे फिर से घर लौट आएं और सामान्य जीवन जीएं। वही नगर थानाध्यक्ष देवराज राय ने बताया कि सिद्धांत विशाल का सोमवार को न्यायालय में बयान दर्ज कराया जाएगा। कोर्ट के निर्देश के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की प्रक्रिया पूरी कर रही है।
मानसिक दबाव पर फिर उठे सवाल
यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव, मानसिक तनाव और युवाओं की बदलती मनोस्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से केवल सफलता की उम्मीद करने के बजाय उनकी मानसिक स्थिति, भावनात्मक जरूरतों और मनोवैज्ञानिक परामर्श पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है, ताकि वे तनाव या अवसाद जैसी परिस्थितियों में कोई बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर न हों।
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