पूर्णिया पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में हुआ एक समझौता पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। वजह है 10 लाख रुपये की एलिमनी (भरण-पोषण)। आमतौर पर इतनी बड़ी राशि का फैसला अदालतें भी पति की आय, संपत्ति और आर्थिक स्थिति का आकलन करने के बाद सुनाती हैं। लेकिन पूर्णिया में एक ऐसा मामला सामने आया, जहां विदेश में मजदूरी करने वाले पति ने पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में पत्नी को 10 लाख रुपये देने के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह न्यायालय का आदेश नहीं है, बल्कि पुलिस परिवार परामर्श केंद्र की मध्यस्थता में दोनों पक्षों की आपसी सहमति से हुआ लिखित समझौता (बॉन्ड) है। यदि भविष्य में पति समझौते का पालन नहीं करता है तो पत्नी न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है।
मामला के. हाट थाना क्षेत्र के कोरटबाड़ी की रहने वाली एक महिला का है। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। महिला ने पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में गुहार लगाई, जिसके बाद उसके पति को कतर (Qatar) से पूर्णिया बुलाया गया। सुनवाई के दौरान केंद्र के सदस्यों ने दोनों को साथ रखने की भरपूर कोशिश की। पत्नी अपने पति के साथ रहना चाहती थी। उसका कहना था कि पति साल में सिर्फ एक बार विदेश से घर आता है। वहीं पति ने पत्नी के साथ रहने से इनकार करते हुए उस पर अविश्वास जताया।
बताया गया कि दोनों का मामला पहले दारुल कजा में भी चल रहा था। लेकिन वहां की सुनवाई बीच में छोड़कर दोनों ने पुलिस परिवार परामर्श केंद्र पर भरोसा जताया और समाधान के लिए यहां पहुंचे।
केंद्र में हुई लंबी सुनवाई में पति पहले 8.50 लाख रुपये देने को तैयार था। लेकिन पत्नी 10 लाख रुपये से कम पर तैयार नहीं हुई। घंटों तक चली बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन सकी।
जब समझौते की सारी कोशिशें विफल हो गईं तो केंद्र के सदस्यों ने महिला थाना प्रभारी से पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया। थाना स्तर पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई।वही शनिवार को अचानक पति-पत्नी फिर महिला थाना पहुंचे। इस बार दोनों ने 10 लाख रुपये के समझौते पर सहमति दे दी। इसके बाद लिखित बॉन्ड तैयार किया गया। समझौते के तहत पति ने तत्काल 5 हजार रुपये पत्नी को दिए और शेष 9 लाख 95 हजार रुपये दिसंबर तक चार किस्तों में देने का वचन दिया। इसके बाद वह वापस कतर रवाना हो गया और भुगतान की जिम्मेदारी अपने भाई को सौंप दी।
समझौता टूटा तो कोर्ट का रास्ता खुला
समझौते में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि तय समय तक पूरी राशि का भुगतान नहीं होता है या समझौते का उल्लंघन होता है तो पत्नी को न्यायालय में कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार होगा। इस पूरे मामले के समाधान में महिला थाना अध्यक्ष एवं केंद्र की संयोजिका राजनंदनी, डीएसपी शिवानी श्रेष्ठ तथा सदस्य दिलीप कुमार दीपक, स्वाति वैश्यत्री, बबीता चौधरी, प्रमोद जायसवाल, रविंद्र शाह और आंचल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समझौता होने के बाद दोनों पक्षों ने पुलिस परिवार परामर्श केंद्र का आभार जताया।
चर्चा में क्यों है यह मामला?
इस समझौते की सबसे बड़ी वजह 10 लाख रुपये की एलिमनी है। आम तौर पर इतनी बड़ी राशि अदालतें पति की कमाई और आर्थिक क्षमता का विस्तृत आकलन करने के बाद तय करती हैं। वहीं इस मामले में विदेश में मजदूरी करने वाले पति ने पुलिस परिवार परामर्श केंद्र की मध्यस्थता में स्वयं 10 लाख रुपये देने पर सहमति जताई। यही कारण है कि यह समझौता पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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