देश को आजाद हुए 79 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन बारसोई क्षेत्र की बाहिन नदी पर आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है। इसके चलते स्थानीय लोगों को आज भी लकड़ी की नाव के सहारे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाहिन नदी पर पुल का निर्माण बेहद जरूरी है, क्योंकि यह मार्ग बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क पथ है। पुल बनने से दोनों राज्यों के लोगों, विशेषकर छात्रों, मरीजों और व्यापारियों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। साथ ही व्यापारिक गतिविधियों को भी नया बढ़ावा मिलेगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर नाव से आवागमन और भी खतरनाक हो जाता है। कई बार लोगों को घंटों नाव का इंतजार करना पड़ता है और हर यात्रा जान जोखिम में डालकर करनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस पुल के निर्माण को लेकर बिहार और पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कई बार सर्वे कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। पुल के अभाव में रायगंज समेत पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में इलाज, शिक्षा और व्यापार के लिए जाने वाले लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इस मुद्दे पर बारसोई की युवा एवं संघर्षशील नेत्री सीमा उमेश यादव ने कहा कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वोट मांगने आते हैं, लेकिन जीतने के बाद बाहिन नदी पर पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। उन्होंने कहा कि आज भी क्षेत्र के लोग मूलभूत सुविधा से वंचित हैं और मजबूरी में जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।
उन्होंने स्थानीय विधायक, सांसद तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से इस महत्वपूर्ण मुद्दे को प्राथमिकता देने की अपील की। साथ ही सांसद से लोकसभा और विधायक से विधानसभा में पुल निर्माण का मुद्दा उठाने तथा बिहार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द पुल निर्माण शुरू कराने की मांग की, ताकि क्षेत्रवासियों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन मिल सके।
Post a Comment