किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत आदिवासी बहुल हारोभीटा गांव का वर्षों पुराना दर्द सोमवार को जनआक्रोश में बदल गया। बरसात के दिनों में गांव का संपर्क टूटने, बच्चों की पढ़ाई बाधित होने, मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने और लगातार आश्वासन के बावजूद पुल निर्माण नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने प्रखंड मुख्यालय तक करीब पांच किलोमीटर पैदल मार्च कर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद ग्रामीणों ने धरना देकर प्रशासन से तत्काल पुल निर्माण शुरू कराने की मांग की।
आंदोलन की सबसे भावुक तस्वीर तब सामने आई, जब स्कूल ड्रेस पहने मासूम बच्चे हाथों में तख्तियां लेकर सबसे आगे चल रहे थे। जिन बच्चों के कंधों पर किताबों और बस्तों का भार होना चाहिए था, वे अपने गांव के भविष्य और बुनियादी सुविधाओं की लड़ाई लड़ते नजर आए। उनके पीछे महिलाएं, बुजुर्ग और किसान भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
धरना के दौरान बच्चों और ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया कि आखिर कब तक उन्हें जान जोखिम में डालकर स्कूल और अस्पताल जाना पड़ेगा। ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष बारिश शुरू होते ही गांव के पास बहने वाले नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे हारोभीटा का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि पुल नहीं होने के कारण सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को होती है। बरसात के दिनों में एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती और मरीजों को खाट पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो जाती है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि हर चुनाव में पुल निर्माण का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई पहल नहीं होती।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट कहा कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पुल निर्माण कार्य शुरू होता हुआ देखना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
धरना समाप्त होने के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचलाधिकारी (सीओ) प्रशासनिक टीम के साथ हारोभीटा गांव पहुंचे। अधिकारियों ने प्रस्तावित पुल स्थल का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से बातचीत कर आवश्यक प्रक्रिया में तेजी लाने का आश्वासन दिया।
हारोभीटा का यह आंदोलन केवल एक पुल की मांग नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों की वर्षों पुरानी पीड़ा की आवाज बनकर सामने आया। बच्चों का सड़कों पर उतरना इस बात का संकेत है कि अब ग्रामीण केवल वादों से नहीं, बल्कि विकास कार्यों की वास्तविक शुरुआत चाहते हैं।
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