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रेड लाइट एरिया से 3 नाबालिग लड़कियां मुक्त, 8 गिरफ्तार; लेकिन कार्रवाई के बाद भी नहीं रुक रहा अवैध धंधा


बिहार पुलिस पूरे राज्य में 'ऑपरेशन नया सवेरा' के तहत मानव तस्करी और देह व्यापार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। पुलिस, विभिन्न एनजीओ और बचपन बचाओ आंदोलन के सदस्यों के साथ मिलकर रेड लाइट एरिया में छापेमारी कर रही है। इस अभियान में कई नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया जा रहा है और धंधे से जुड़े लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

इसी कड़ी में 13 जुलाई को पूर्णिया एसपी के निर्देश पर बनमनखी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी शैलेश प्रीतम के नेतृत्व में बनमनखी थाना क्षेत्र के आम्रपाली नगर स्थित रेड लाइट एरिया में छापेमारी की गई। टीम में ट्रिनिटी इंडिया ट्रस्ट के सामाजिक कार्यकर्ता, बचपन बचाओ आंदोलन के सदस्य, बनमनखी थानाध्यक्ष तथा महिला-पुरुष पुलिस बल शामिल थे।

पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, छापेमारी के दौरान तीन नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित मुक्त कराया गया। वहीं अनैतिक देह व्यापार और नाबालिगों के शोषण में संलिप्त दो पुरुष और छह महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में बनमनखी थाना कांड संख्या 207/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम (ITPA) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मौके से तीन मोबाइल फोन और एक स्कैनर भी बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

इससे पहले पूर्णिया के जीरो माइल रेड लाइट एरिया में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी, जहां कई लड़कियों को मुक्त कर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल बरकरार
पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद एक सवाल बार-बार उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छापेमारी के बाद रेड लाइट एरिया कुछ दिनों के लिए पूरी तरह बंद हो जाता है, लेकिन कुछ समय बाद फिर वहीं अवैध गतिविधियां शुरू हो जाती हैं।

ऐसे में सवाल यह है कि जब इन इलाकों की पहचान पहले से है और लगातार छापेमारी भी हो रही है, तो यह अवैध कारोबार दोबारा कैसे शुरू हो जाता है? क्या केवल छापेमारी और गिरफ्तारी से समस्या का समाधान संभव है, या फिर इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और प्रभावी फॉलो-अप कार्रवाई की जरूरत है?

इन परिस्थितियों में स्थानीय थाना की निगरानी व्यवस्था और नियमित पुलिस गश्त को लेकर भी सवाल उठते हैं। हालांकि, किसी भी थाना या अधिकारी की भूमिका पर बिना जांच के निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यह जांच का विषय है कि आखिर कार्रवाई के बाद भी यह कारोबार दोबारा किस तरह सक्रिय हो जाता है।

फिलहाल, पूर्णिया पुलिस का कहना है कि 'ऑपरेशन नया सवेरा' आगे भी जारी रहेगा और मानव तस्करी तथा देह व्यापार में शामिल पूरे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि यह अभियान इन अवैध गतिविधियों पर स्थायी रोक लगाने में कितना सफल होता है।

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