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रेलवे गुमटी संख्या-13 पर प्रस्तावित ROB का विरोध तेज, बोले व्यापारी- 'विकास चाहिए, लेकिन रोजगार की कीमत पर नहीं'


कटिहार और पूर्णिया रेलवे जंक्शन के बीच स्थित रेलवे गुमटी संख्या-13 पर रेल मंत्रालय द्वारा लगभग ₹44.88 करोड़ की लागत से प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज (ROB) निर्माण योजना का स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों और नागरिकों ने विरोध शुरू कर दिया है। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना व्यापक सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के इस परियोजना को लागू करने से बेलौरी क्षेत्र का प्रमुख बाजार गंभीर रूप से प्रभावित होगा।

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रस्तावित ओवरब्रिज के निर्माण से हजारों छोटे दुकानदारों, फुटपाथ विक्रेताओं, व्यापारियों और दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। उनका कहना है कि पहले ही एनएच-131ए फोरलेन निर्माण के कारण क्षेत्र का कारोबार प्रभावित हुआ है, ऐसे में यह नई परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।

विरोध कर रहे लोगों ने दावा किया कि रेलवे गुमटी संख्या-13 पर यातायात जाम की समस्या इतनी गंभीर नहीं है कि उसके समाधान के लिए ₹44.88 करोड़ की लागत से ओवरब्रिज बनाया जाए। उनका सुझाव है कि कम लागत वाले वैकल्पिक उपायों से भी समस्या का समाधान संभव है।

स्थानीय लोगों ने बेलौरी-सनौली रोड के लालबाड़ी हनुमान मंदिर से एनएच-31 बाईपास तक सड़क चौड़ीकरण कराने तथा कटिहार मोड़ की तर्ज पर बेलौरी चौक और लालबाड़ी हनुमान मंदिर से रेलवे गुमटी संख्या-13 तक भारी वाहनों के लिए निर्धारित समय पर 'नो एंट्री' व्यवस्था लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि इन उपायों से वर्तमान ढांचे में ही यातायात व्यवस्था बेहतर हो सकती है।

स्थानीय नागरिक अजय कुमार दास (वायु सैनिक), मनोज कुमार साह, अनिल कुमार दास (ननकी), गौतम दत्ता, पवन कुमार साह, प्रकाश कुमार साह, सूरज कुमार साह, ललित कुमार साह, सूरज पोद्दार, दिलीप साह, सुबोध साह सहित अन्य लोगों ने सरकार और रेल मंत्रालय से मांग की कि परियोजना की आवश्यकता का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी सर्वे कराया जाए। साथ ही स्थानीय व्यापार और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत सामाजिक-आर्थिक अध्ययन कराया जाए तथा सड़क चौड़ीकरण और रूट डायवर्जन जैसे वैकल्पिक समाधानों पर विशेषज्ञ समिति विचार करे।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जब तक परियोजना की समीक्षा और पुनर्मूल्यांकन पूरा नहीं हो जाता, तब तक निर्माण कार्य स्थगित रखा जाए। उनका कहना है कि बेलौरी की जनता ऐसा विकास चाहती है जिससे यातायात व्यवस्था भी बेहतर हो और स्थानीय लोगों का रोजगार भी सुरक्षित रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने तक लोकतांत्रिक तरीके से उनका विरोध जारी रहेगा।

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