Top News

अक्षय तृतीया समारोह में 6 पारणे पूर्ण, आत्मसंयम सबसे बड़ा तप : मुनि ज्ञानेन्द्रप.

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर दालखोला में मुनिश्री ज्ञानेन्द्र कुमार जी, मुनिश्री प्रशांत कुमार जी के सान्निध्य में वर्षीतप पारणा समारोह श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुआ, जिसमें 6 तपस्वियों ने पारणा किया।
मुनिश्री ज्ञानेन्द्र कुमार जी ने कहा कि तपस्या कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ साधन है। क्रोध विजय, क्षमा, त्याग, संयम और इन्द्रिय निग्रह भी तप के स्वरूप हैं। आत्मसंयम सबसे बड़ा तप है।
मुनिश्री प्रशांत कुमार जी ने कहा कि भगवान ऋषभदेव ने समाज को असि, मसि और कृषि का ज्ञान दिया। उनके जीवन से त्याग, संयम और मधुरता की प्रेरणा लेनी चाहिए।
मुनिश्री कुमुद कुमार जी ने कर्म सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए धर्म साधना में अंतराय न डालने की प्रेरणा दी। मुनिश्री पद्म कुमार जी ने तपस्या को कठिन किंतु महान साधना बताया।
खर्तरगच्छ मूर्तिपूजक संप्रदाय की साध्वी श्री सम्यक प्रभा जी महाराज सा ने कहा कि रसना पर नियंत्रण शूरवीरों का कार्य है।
इस अवसर पर वर्षीतप तपस्वी बहनों सविता सेठिया, सरला बरडिया, विनीता दुगड़, कुसुम मालू, नीलम पुगलिया तथा निकिता सिरोहिया का अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या मंडल के मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण तेरापंथ सभा अध्यक्ष नौरंग जी नाहर द्वारा दिया गया। महिला मंडल ने गीतिका द्वारा अपने भाव प्रस्तुत किया ।महिला मंडल अणुव्रत समिति ज्ञानशाला कन्या मंडल ने मिलकर  भगवान ऋषभ के जीवन की कथा को नाटक के रूप में प्रस्तुत किया महिला मंडल की अध्यक्षा वंदना बैद  ने अणुव्रत समिति की अध्यक्षा प्रेमलता जैन ने और तेयुप के अध्यक्ष विक्रम चोपड़ाने । अपना वक्तव्य दिया पुगलिया परिवार के बच्चों ने लघुनाटिका प्रस्तुत की। रायगंज, खुश्कीबाग, इस्लामपुर, धुलाबाड़ी (नेपाल), फारबिसगंज, किशनगंज, कटिहार, मालदा, सैंथिया सहित विभिन्न स्थानों से आए प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
सम्मान समारोह का सफल संचालन हरीश बैद ने किया

Post a Comment

Previous Post Next Post